बचपन से हमें ईमानदारी का पाठ पढ़ाया जाता है. हमें सिखाया जाता है कि हमें ईमान को ध्यान में रखकर हर काम करना चाहिए. यूं तो दुनिया के सामने हर शख़्स ख़ुद को ईमानदार कहता है लेकिन कोई कितना ईमानदार है, ये तब साबित होता है जब कोई आस-पास न हो. अगर सड़क पर 10, 100 या चलिए 500 का नोट मिले तो कितने प्रतिशत लोग ईमानदारी से उसे किसी ज़रूरतमंद को दे देंगे, ये सोचने वाली बात है. मध्य प्रदेश की 13 साल की एक लड़की ने हम सभी के सामने ईमानदारी की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर सभी तालियां बजाएंगे.

7 लाख के ज़ेवर से भरा बैग लौटाया

मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले की रीना ने अपनी सच्चाई और ईमानदारी से सभी का दिल जीत लिया. रीना को सड़क पर 7 लाख के ज़ेवर से भरा बैग मिला. रीना ने ये बैग ज़ेवरों के मालिक को लौटा दिया. ये घटना उदयपुरा पुलिस स्टेश के काकारुआ गांव की है. दरअसल यशपाल सिंह पटेल की बेटी बाइक पर पीछे बैठी थीं और उनके हाथ से बैग गिर गया. बैग में 7 लाख रुपये के सोने के ज़ेवर थे. 6ठी कक्षा में पढ़ने वाली रीना की नज़र सड़क पर गिरे बैग पर पड़ी. उसने कुछ देर रुककर इंतज़ार किया लेकिन जब कोई बैग लेने नहीं आया तब रीना ने बैग उठा लिया.

रीना और उसके पिता ने पुलिस को सूचित किया

रीना ने काफ़ी देर तक बैग के पास खड़े होकर इंतज़ार किया लेकिन जब कोई बैग लेने नहीं आया तब रीना ने बैग उठाया और घर ले आई. घर आकर उसने अपने पिता, मंगल सिंह हरिजन को बताया. बता दें कि रीना के पिता मज़दूरी करते हैं. मंगल सिंह ने अपने नियोक्ता को सूचित किया जिसने पुलिस में ख़बर की. जैसे ही पुलिस के पास ये मामला पहुंचा, रीना को थाने बुलाया गया.

रीना को दिया गया ईमानदारी का बड़ा ईनाम

रीना ने थाने जाकर बैग पुलिस के हवाले किया. पुलिस ने बैग के मालिक, यशपाल पटेल को फ़ोन करके बैग मिलने की ख़बर दी. यशपाल न सिर्फ़ बैग वापस पाकर ख़ुश था बल्कि रीना की ईमानदारी ने भी उनका दिल जीत लिया. यशपाल ने रीना को ईनाम में 51,000 रुपये और नए कपड़े दिए. उदयपुरा थाने के इन्चार्ज, प्रकाश शर्मा ने भी रीना को 1100 रुपये का ईनाम दिया. रीना की ईमानदारी की ख़बर उसके स्कूल तक भी पहुंची. स्कूल में रीना को पुरस्कृत किया गया और उसके शिक्षकों ने कहा कि रीना ने ये काम करके न सिर्फ़ अपने माता-पिता बल्कि स्कूल का भी मान बढ़ाया है.