बिहार के प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब पौने दो करोड़ बच्चों के लिए खुशखबरी है। इसी माह के अंतिम दिन यानी 28 फरवरी से पहली से आठवीं कक्षा तक में पढ़ने वाले बच्चों को उनके स्कूल में ही दोपहर का ताजा भोजन मिलने लगेगा। करीब दो साल से पके हुए मध्याह्न भोजन (एमडीएम) का वितरण बंद है। सोमवार से राज्य के सभी प्रारंभिक विद्यालय शत प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलने लगे और पहले ही दिन मध्याह्न भोजन निदेशक सतीश चन्द्र झा ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस बाबत आदेश जारी कर दिया।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में मार्च 2020 से ही मध्याह्न भोजन का भौतिक रूप से संचालन बंद है। हालांकि राष्ट्रीय खाद्या सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभुक बच्चों के अभिभावकों को सूखा राशन (चावल) और इसे पकाने (परिवर्तन मूल्य) का पैसा दिया जा रहा है। हाल ही में जनवरी से 15 फरवरी तक के 34 कार्यदिवसों के लिह अनाज और राशि बांटने का निर्देश अपर मुख्य सचिव ने दिया था।

प्रोटोकॉल का पालन करें

सोमवार को एमडीएम (पीएम पोषण योजना) के निदेशक सतीश चन्द्र झा ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देशित किया है कि 28 फरवरी से पठन-पाठन के साथ-साथ भौतिक रूप से मध्याह्न भोजन योजना का संचालन कोरोना प्रोटोकॉल के तहत कराना सुनिश्चित करें। इसके अनुपालन में किसी भी तरह की कोताही बरती जाती है तो उसको गंभीरतापूर्वक लेते हुए नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।