एक मां के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण क्या हो सकता है जब उसका बेटा उसी की राह पर चलते हुए उसी की अकेडमी से देश की सेना में ऑफिसर बनने में सफल हो जाए. जी हां, रिटायर्ड मेजर स्वाति चतुर्वेदी के लिए ऐसा ही क्षण था जब उसका बेटा चेन्नई के ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी से कमीशन प्राप्त कर पासिंग आउट परेड में शामिल हुए. रक्षा मंत्रालय ने मां-बेटे के इस अद्भुत दृश्य को कैमरे में कैद कर लिया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है. दिल को छू लेने वाली यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है. दरअसल, रिटायर्ड मेजर स्मिता चतुर्वेदी ने चेन्नई के इसी ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी से 1995 में पास आउट हुई थी और अब उनका बेटा भी अब इसी ट्रेनिंग अकेडमी से कमीशन प्राप्त किया है.

मालदीव के मेजर जनरल के सामने पासिंग आउट परेड
स्वाति चतुर्वेदी ने 27 साल पहले चेन्नई के ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी से कमीशन हुई थीं. पासिंग आउट परेड के लिए चेन्नई के ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी में समारोह का आयोजन किया था जिसमें मालदीव के डिफेंस ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अब्दुल्ला शमाल ने परेड की समीक्षा की. रक्षा मंत्रालय के चेन्नई स्थित पीआरओ ने इस तस्वीर को ट्विटर पर शेयर किया है और लिखा है कि 27 साल बाद बेटे ने मां की कहानी को दोहराया है. ट्विटर पर पीआरओ ने लिखा, मेजर स्मिता चतुर्वेदी (रिटायर्ड) चेन्नई के ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी से 27 साल पहले 1995 में कमीशन हुई थीं. उन्होंने आज 27 साल बाद उसी तरह से इसी ट्रेनिंग अकेडमी में अपने बेटे को कमीशन प्राप्त करते हुए देखा.

याद आ गई 27 साल पुरानी यादें
यह खुशी महिला अधिकारी के जीवन में खुशी से भरा हुआ दुर्लभ क्षण था. रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने स्वाति चतुर्वेदी की वह तस्वीर भी पोस्ट की है जब वह चेन्नई के ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी में प्रशिक्षण ले रही थीं. मेजर स्वाति चतुर्वेदी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि सचमुच यह मेरे जीवन का बेहद शानदार क्षण है. वीडियो संदेश में स्वाति चतुर्वेदी कहती हैं, यह पीढ़ी हमारी पीढ़ी से काफी आगे है और हर चुनौतियों का सामना करने के लिए पहले से ज्यादा तैयार है. मेरे लिए यह खुशी का क्षण है. मैं पासिंग आउट परेड से कमीशन प्राप्त करने वाले सभी कैडेट को बधाई देना चाहती हूं. मुझे अपने अकेडमी में बिताए दिनों की याद आ रही है. अब यहां बहुत कुछ बदल गया है. सब कुछ नया हो गया है. नई चुनौतियां भी हैं और सभी तरह से ये कैडेट सुसज्जित हो गए हैं. ये हमारी पीढ़ी से ज्यादा परिपूर्ण हैं.