पटना: आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के छोटे बेटे इंजीनियर अजीत सिंह (Jagdanand Singh Son Ajit Singh) अपने समर्थकों के साथ जेडीयू में शामिल हो गए। कर्पूरी सभागार में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अजीत सिंह को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने जगदानंद सिंह को ऑफर दे दिया। उन्होंने कहा कि पिता अपने बेटे का दर्द समझें और हमें उम्मीद है कि वो अजीत सिंह का अनुसरण करेंगे।

”अजीत जी की एक पहचान तो ये है कि वो जगदानंद सिंह के बेटे हैं। इसके अतिरिक्त भी उनकी एक पहचान है। अजीत सिंह 13 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं. सबसे बड़ी बात कि बीआईटी से उन्होंने इंजीनियरिंग की है और एक अच्छे फर्म में काम कर रहे थे, लेकिन उसे छोड़कर महिला सशक्तिकरण पर लगातार काम कर रहे हैं। लेकिन, मुझे आश्चर्य होता है कि जगदा बाबू कैसे अपमानित हो कर अपना स्वाभिमान जगा नहीं पा रहे हैं। अब जब उनके बेटे जेडीयू में शामिल हो चुके हैं, तो पूरी उम्मीद है कि जगदा बाबू का स्वाभिमान जगेगा और बेटे का अनुसरण करेंगे।’- ललन सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, जदयू

”आरजेडी कार्यकर्ताओं के लिए कब्रगाह है और वहां अटैची वालों की ही पूछ है। यह विचारणीय है कि आरजेडी में जो नेता हैं, उनके बेटे दूसरे दल में जा रहे हैं क्योंकि उनके पिता का अपमान हो रहा है। बिहार का गौरव कोई बढ़ा सकता है तो वह नीतीश कुमार ही हैं। आरजेडी का कोई भविष्य नहीं है। कहने के लिए ए टू जेड की पार्टी कहा जा रहा है। वहां अब बिजनेस कर सकते हैं, ठेकेदारी कर सकते हैं, लेकिन टिकट अटैची वाले को ही मिल सकता है।’- अजीत सिंह, जेडीयू नेता (जगदानंद सिंह के बेटे)

जगदानंद सिंह का परिवार:

बता दें कि आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के चार बेटे हैं। दिवाकर सिंह, डॉक्टर पुनीत कुमार सिंह, सुधाकर सिंह जो रामगढ़ से विधायक हैं और इंजीनियर अजित कुमार सिंह। अजीत सिंह तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने अंर्तजातीय विवाह किया था। जगदानंद सिंह ने अपने बड़े भाई और समाजवादी नेता सच्चिदानंद सिंह के खिलाफ चुनाव लड़कर ही राजनीति में अपनी पहचान बनाई थी। सच्चिदानंद सिंह उस समय के प्रभावशाली नेताओं में से एक थे।

2010 में बड़े बेटे ने की थी बगावत:

बता दें कि जगदानंद सिंह के छोटे बेटे से पहले बड़े बेटे सुधाकर भी बगावत कर चुके हैं। हालांकि अभी वो आरजेडी के रामगढ़ से विधायक हैं। जगदानंद सिंह के बड़े बेटे सुधाकर सिंह 2010 में बगावत कर चुके हैं। हालांकि उस समय आरजेडी के तरफ से टिकट देने पर सहमति भी बन गई थी। लेकिन जगदानंद सिंह तैयार नहीं हुए और सुधाकर सिंह को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बना लिया लेकिन चुनाव में जगदानंद सिंह ने अपने बेटे के खिलाफ जमकर प्रचार किए और सुधाकर चुनाव भी हार गए।