महाराजगंज: टेंपो का चालान भरने के लिए एआरटीओ कार्यालय पहुंचे युवक की दर्दभरी कहानी सुनकर अधिकारी भावुक हो गए। दरअसल, मुफलिसी में जीवन काट रही मां ने बेटे को टेंपो का चालान भरने के लिए मंगलसूत्र बेचकर रकम अदा करने भेजा था। मुफलिसी का शिकार युवक मंगलसूत्र बेचकर मिले रुपयों के साथ गुरुवार को एआरटीओ कार्यालय पहुंचा था। युवक की दास्तां सुनकर एआरटीओ का दिल पसीज गया और उन्होंने खुद की जेब से युवक के चालान की रकम जमा की और मां के मंगलसूत्र को ज्वैलर से वापस लेने की हिदायत दी।

पुरंदरपुर थाना क्षेत्र के सिंहपुर ताल्ही गांव के विजय कुमार के पिता टेंपो चलाते हैं। उनकी गाड़ी का बीते 8 जून को चालान कर दिया गया था और गाड़ी को सीज कर पुरंदरपुर थाने भेज दिया गया था। विजय उस चालान की रकम को जमा कराने गुरुवार को एआरटीओ कार्यालय पहुंचा। पहले तो संकोच में कुछ देर अपनी बात नहीं कह सका तो एआरटीओ आरसी भारतीय ने उससे आने का कारण पूछा।

मां का मंगलसूत्र बेचकर चालान भरने पहुंचा विजय:

विजय कुमार ने अपनी दर्दभरी दास्तां एआरटीओ आरसी भारतीय को सुनाई। विजय ने बताया कि मां ने मंगलसूत्र बेचकर 13 हजार रुपये दिए हैं। इतना कहते ही वह फफककर रो पड़ा। उसकी दर्द भरी कहानी सुनने के बाद एआरटीओ ने पहले उसे पानी पिलाया, फिर खुलकर पूरी बात पूछी। विजय ने बताया कि पिता राजकुमार की एक आंख नहीं है। वह टेंपो चलाते हैं। मैं मजदूरी करता हूं। फेल होने के बाद हाईस्कूल की पढ़ाई भी नहीं कर सका।

एआरटीओ ने रकम भरी, इंश्योरेंस भी कराया:

विजय ने बताया कि बीते आठ जून को टेंपो का चालान कट गया था, जिसका 24,500 रुपये जुर्माना जमा करना है। इस उम्मीद में यहां आया कि शायद शेष रकम माफ हो जाएगी। परिवार में छह बहने हैं। अभी एक बहन की शादी हुई है। अगर 13 हजार रुपये के अलावा बची राशि माफ नहीं हुई तो उसके पिता खेत बेचकर रकम देंगे। विजय की दास्तां सुनकर एआरटीओ आरसी भारतीय का दिल पसीज गया, वह भावुक हो गए। उन्होंने विजय को निराश नहीं होने की बात कहते हुए चालान की पूरी रकम स्वयं जमा की। इसके साथ ही टेंपो का इंश्योरेंश भी कराया। इसके बाद एआरटीओ ने विजय को कुछ नकद राशि देकर भविष्य में हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया।

नकद राशि देकर और जरूरत पड़ने पर बताने को कहा:

एआरटीओ आरसी भारती ने विजय से कहा कि जो पैसे लेकर आए हो उसे लेकर घर जाओ। ज्वेलर से मंगलसूत्र छुड़ाकर मां को वापस देना और पिता को बताना कि वह खेत ना बेचे। उन्होंने अपने पास से 17000 रुपये युवक को देते हुए कहा कि तुम पढ़ाई करो। युवक का मोबाइल नंबर लिया और खुद का नंबर देकर कहा कि जरूरत पड़े तो बताना जब बहनों की शादी करना तो भी बताना।

मानवता भरे कदम की हर तरफ चर्चा:

एआरटीओ आरसी भारतीय की दरियादिली और युवक की मदद करने के लिए कार्यालय में मौजूद सभी कर्मी एवं अन्य लोगों ने सराहना की। एआरटीओ के मानवता भरे काम की पूरे विभाग और समाज में चर्चा हो रही है। विभाग के लोगों ने बताया कि एआरटीओ बहुत शालीन और हर किसी मदद करने वाले व्यक्ति हैं। इससे पहले भी वह लोगों की मदद कर चुके हैं और करते रहते हैं।

एआरटीओ बोले- हर किसी को मदद करनी चाहिए:

एआरटीओ आरसी भारतीय ने कहा कि हम सभी को एक दूसरे की मजबूरी को समझना चाहिए और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है जो युवक कार्यालय में आया था उसकी गाड़ी का नियम और कानून के तहत चालान किया गया था। उस समय हमने अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन किया था और नियम व कानून से अपना काम किया था। वहीं, जब उसने बताया कि मां का मंगलसूत्र बेचकर वह चालान जमा करने आया है तो हमने मानवता दिखाते हुए उसकी मदद की और यह हर किसी को करना चाहिए।