छठ पर्व के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ का महत्वपूर्ण दिन है। इसे डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य देव के तेज से शोभित छठ पूजा का यह त्यौहार बीते 8 नवंबर को शुरू हुआ था। मुंबई में बुधवार को शाम के समय डूबते हुए सूर्य को पहला अर्ध्य दिया जाएगा। सूर्य षष्ठी का यह व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत, पारिवारिक सुख-समृद्धि और मान-सम्मान हेतु किया जाता है।

छठ के तीसरे दिन शाम को बांस की टोकरी में फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि से अर्ध्य का सूप सजाया जाता है, जिसके बाद व्रती अपने परिवार के साथ सूर्य को अर्ध्य देतीं है। इसके साथ ही चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को दूसरा अर्ध्य दिया जाएगा और अर्ध्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।

सूर्यास्त का समय

शाम के समय भगवान सूर्य को अर्ध्य देने के लिए सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 30 मिनट पर है और छठ पूजा के चौथे दिन सूर्योदय का समय सुबह 6 बजकर 41 मिनट पर है। सबसे पहले छठ पूजा में उपयोग आने वाली सभी सामग्रियों को एक बांस की टोकरी में रखे। वही, सूर्य को अर्ध्य देते समय सभी प्रसाद सूप में रखें और सूप में ही दीपक जलाए। फिर नदी में उतरकर सूर्य देव को अर्ध्य दें।