केंद्र सरकार ने मीडिया में खूब हो-हल्ला मचाने के बाद तेजस ट्रेन को शुरू किया था। सरकार का मानना था कि हवाई यात्रियों के लिए विकल्प साबित होगा और आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन का लोग जमकर इस्तेमाल करेंगे। लेकिन इसका उल्टा ही हो गया। प्राइवेट एजेंसी के हाथों में सौंपी गई है ट्रेन लगातार घाटे में चल रही है। इससे सरकार को अब तक करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है।

अब तक इतने करोड़ का हुआ है घाटा

रेल मंत्रालय ने पिछले दिनों राज्यसभा में बताया तेजस एक्सप्रेस को चलाने में कुल मिला कर फायदा नहीं है। दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस ने साल 2019 में 2.33 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। लेकिन इसे साल 2020-21 में 16.79 करोड़ और 2021-22 में 8.50 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। अहमदाबाद-मुंबई तेजस पिछले तीन सालों से निरंतर नुकसान झेल रही है। पहले साल 2.91 करोड़, दूसरे साल 16.45 करोड़ और तीसरे साल 16 करोड़ का नुकसान हुआ है।

ये है घाटे की मुख्य वजह

रेलवे से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि तेजस में डायनेमिक फेयर पॉलिसी के कारण सामान्य यात्री सफर करने से कन्नी काटते हैं। इस ट्रेन में ऐसी व्यवस्था है कि 10 फीसदी टिकट बुकिंग के बाद किराया अपने आप बढ़ जाता है। ऐसा हर 10 फीसदी बुकिंग के बाद होता है। इसी चक्कर में कई बार तेजस ट्रेन का किराया फ्लाइट टिकट से भी अधिक हो जाता है।