बिहार में शायद ही किसी को याद होगा की कभी लाइब्रेरियन के पद पर भर्ती आई होगी। लाइब्रेरियन के नियुक्ति के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि लाइब्रेरियन की नियुक्ति प्रवेश परीक्षा के आधार पर की जाएगी। बिहार में यूजीसी स्केल के लाइब्रेरियन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर एक बार भी वैकेंसी नहीं आई है। इस कारण से राज्य के 95 फीसद से अधिक कॉलेज लाइब्रेरियन के पद रिक्त हैं।

साथ ही अन्य पुस्तकालय कर्मचारी जैसे असिस्टेंट कॉलेज लाइब्रेरियन और लाइब्रेरियन अटेंडेंट के भी 95 फीसद से अधिक पद खाली है। आश्चर्य की बात है कि अभी तक कॉलेज लाइब्रेरियन के लिए भी नियुक्ति हेतु परिनियम भी तैयार नहीं किया गया है। उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालयाध्यक्षों के 2789 पद स्वीकृत हैं। इसके विरुद्ध 893 पद रिक्त हैं। लाइब्रेरियन पद का सृजन साल 2007 में हुआ। इस पद पर नियोजन की कार्रवाई 2008 से शुरू होकर 2019 तक चली।

14 साल बाद होगी लाइब्रेरियन की भर्ती

बिहार में  एक दशक से भी अधिक समय के बाद लाइब्रेरियन के पदों पर भर्ती आने वाली है लेकिन कब इसकी कोई खबर नहीं है। अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है की कितने पद सृजित किये जाएंगे। इन पदों के लिए भर्ती प्रवेश परीक्षा के आधार पर होनी है। इसके लिए नियमावली बनकर तैयार हो गई है। और फिलहाल 893 पदों को ही सृजित किया गया है। वहीँ जानकारी के लिए आपको बता दें की ये सिर्फ उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए है।

आपको याद दिला दें कि शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी विगत वर्ष सदन में 3 से 4 बार लाइब्रेरियन नियुक्ति की बात कह चुके हैं किन्तु अभी तक शिक्षा विभाग रिक्तियों कि गणना नहीं कर पाया है। बिहार राज्य में आखिरी बार 2008 में लाइब्रेरियन के पदों पर नियुक्ति हुई थी।

एसोसिएशन लगातार कर रहा है मांग

ऑल बिहार ट्रेंड लाइब्रेरियन एसोसिएशन के सदस्य अपनी मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन इसका कोई परिणाम निकल कर सामने नहीं आ पाया है। मांग है कि लगातार शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है किन्तु लाइब्रेरियन की नियुक्ति नहीं की जा रही है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास कुमार सिंह का कहना है कि सरकार लगातार आश्वासन दे रही है। नियमावली बनाने और पद सृजित करने के नाम पर मुद्दा केवल टाला जा रहा है। साथ ही विकास ने यह भी कहा कि यदि जल्द इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया तो जन आंदोलन होगा।