जो कामयाबी हासिल करने का जूनून रखते है. वे समुद्र पर भी पत्थर का पुल बना देते हैं . आज हम आपको जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उनके लिए ये लाइने एक दम फिट बैठती है. इस आईएएस अधिकारी का नाम आयुषी है. जिन्होंने नेत्रहीन होने के बाद भी ना सिर्फ देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की बल्कि अच्छी खासी रैंक से पूरे देश में अपना नाम रोशन कर दिया. आइए जानते हैं आयुषी ने कैसे इस परीक्षा में सफलता हासिल की.

कौन हैं यूपीएससी टॉपर आयुषी

दिल्ली की रहने वाली आयुषी एक मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता का नाम अशोक हैं. वहीं मां का नाम आशा रानी है. पिता HEL में चीफ डिस्पेंसर हैं वहीं,मां सीनियर नर्सिंग के पद से रिटायर हो चुकी हैं. आयुषी की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली से ही हुई. साल 2009 में उन्होंने 12वीं की परीक्षा पास की. बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा होने के कारण उन्हें सफलता मिलती चली गई. साल 2011 में उन्होंने दिल्ली यूनीवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. यहां भी वो टॉपर रहीं.

साल 2016 में उन्होंने इग्नू से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. एक साक्षात्कार में वो कहती हैं कि उन्हें नेत्रहीन होने के कारण काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता था. लेकिन परिवार के सहयोग की वजह से उन्हें ज्यादा मुश्किल नहीं मिली. परिवार की सलाह पर ही उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी.

आसान नहीं थी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी

अपनी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के बारे में आयुषी कहती हैं कि उन्हें परीक्षा की तैयारी के लिए काफी कम समय मिलता था. रात में कम सोती थी और स्कूल से लौटकर पढ़ाई करती थी. काम की वजह से कोचिंग जाने का वक्त नहीं था. इसलिए घर पर ही पढ़ाई करती थी. इतना ही नहीं तैयारी एनसीईआरटी की किताबों के जरिए करती थी. कुछ सब्जेक्ट्स को समझने के लिए यूट्यूब का सहारा भी लिया. साथ ही साथ वो UPSC की तैयारी से संबंधित वीडियो को भी सुनती थी, जिसने उसकी काफी मदद की. ग्रेजुएशन की तैयारी के दौरान उन्हें लगातार 3 बार असफलता का सामना करना पड़ा. इस दौरान वो काफी निराश हो गई. लेकिन परिवार के सपोर्ट की बदौलत उन्होंने फिर से अपनी तैयारी शुरू कर दी

5वें प्रयास में बनीं यूपीएससी टॉपर

आयुषी को यूपीएससी परीक्षा में 5वें प्रयास में सफलता मिली. इसबार उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में 48वां स्थान हासिल कर लिया. उनकी इस सफलता से उनके माता-पिता काफी खुश हैं. अपनी सफलता को लेकर युवओं को प्रेरित करते हुए आयुषी बताती हैं कि अगर आप लगातार मेहनत करते हैं तो आपको अच्छे परिणाम जरूर मिलते हैं. आयुषी का कहना है कि शिक्षा सशक्तीकरण का एक साधन है. वो विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा की दिशा में काम करना चाहती हैं और दिव्यांग लोगों को प्रेरित करना चाहती हैं.