भगवान सूर्य देव की उपासना का महापर्व छठ आज नहाए खाए के साथ ही शुरू हो जाएगा। यह पर्व चार दिन मनाया जाता है। पहले दिन नहाए-खाए, दूसरे दिन खरना, तीसरे और चौथे दिन क्रमशः अस्त होते और उदय होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्ध्य देते हैं। छठ महापर्व का धार्मिक महता के साथ वैज्ञानिक महत्व है। माना जाता है कि छठ महापर्व में भगवान सूर्य को अर्ध्य देने पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों से शरीर की रक्षा होती है। अस्ताचल और उदयाचल सूर्य को नमन करने से स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। जो इस पर्व के वैज्ञानिक महत्व को दर्शाता है।

नहाए-खाए के दौरान कद्दू-भात के साथ पवित्र पर्व का आरंभ होग। भारतीय रीति रिवाज में 36 घंटा का उपवास वाला एकमात्र यह पर्व है। मान्यता है कि ऐसा पर्व है की ईश्वर श्रद्धा का ज्वार हर एक मनुष्य के रोम-रोम पुलकित कर देता है। प्रकृति से सीधा संवाद के इस आस्थावान पर्व में नियम निष्ठा सर्वोपरि है।

आज नहाए-खाए में क्या करें?

सुबह स्नान कर नई साड़ी या अन्य वस्त्र पहने। महिलाएं माथे पर सिंदूर लगाकर साफ सफाई करें। छठ के प्रसाद और पकवान के लिए मिट्टी लेपकर चूल्हा बनाएं या गैस चूल्हे को साफ करें। कठिन व्रत की शुरुआत में आज आखरी बार नमक खाएं। चावल, भात बनेगा और सेंधा नमक से कद्दू यानी लौकी की सब्जी बनेगी। घर के सभी लोग यही भोजन करेंगे। छठ का मुख्य प्रसाद ठेकुआ बनाया जाएगा।