राजधानी की सड़को पर एक अप्रैल से अब डीजल बसें और ऑटो नहीं चलेगी. प्रशासन की ओर से यह फरमान जारी किया गया है. गौरतलब है कि ये फरमान कोई नया नहीं है. 2019 में पटना वायु प्रदूषण के मामले में देश में टॉप पर पहुंच गया था, यहां का एक्यूआई लेवल 400 के पार चला गया था, इसके बाद सरकार ने डीजल गाड़ियों पर प्रतिबन्ध लगाने का फैसला लिया था.

पहले 31 जनवरी 2020 से ही बंद होने वाला था जिसके बाद बढ़ा कर 31 मार्च 2021 किया गया फिर 30 सितम्बर और अब 31 मार्च 2022 तय किया गया है ताकि लोग अपनी गाड़ी को सीएनजी में कन्वर्ट करा ले. इस बार परिवहन विभाग मोहलत देने की मूड में बिलकुल भी नहीं दिख रहा. हालांकि सरकार सीएनजी में कन्वर्ट करवाने पर अनुदान भी दे रही है. वर्तमान समय में 12000 से अधिक डीज़ल गाड़िया शहर में चल रही है. ये नियम लागू होने के बाद इस तरह की सभी गाड़ियां शहर से बाहर हो जाएगी.

सरकार सीएनजी बस खरीदने के लिये और ऑटों में सीएनजी किट लगाने पर अनुदान दे रही हे. इसके साथ ही पुराने परमिट पर नई सीएनजी बस चला सकेंगे. कोरोना के कारण ज्यादातर ऑटो को सीएनजी में नहीं बदला जा सका है. बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने शहर में सिर्फ सीएनजी बस चलाने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी है.