अभी सावन चल रहा है और इस महीने का पहला सोमवार 18 जुलाई को है। शिव भक्तों के लिए सावन सोमवार का महत्व काफी अधिक है। इस दिन भक्त शिव जी की विशेष पूजा-अभिषेक करते हैं, व्रत करते हैं और मंत्र जप करते हैं। अगर कोई व्यक्ति सोमवार की सुबह पूजा-पाठ नहीं कर पाता है तो वह सूर्यास्त के बाद भी शिव पूजन कर सकता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक शिव पुराण में लिखा है कि शिव पूजा, अभिषेक सूर्यास्त के बाद भी किए जा सकते हैं। महाशिवरात्रि पर रात में ही विशेष शिव पूजा की जाती है। सावन में सुबह पूजा नहीं कर पा रहे हैं तो शाम 6 बजे से शिव जी का पूजन शुरू कर सकते हैं।

शिवलिंग पर जल और दूध के अलावा गन्ने का रस भी चढ़ाएं। सभी सुखों की कामना से गन्ने के रस से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद रात में करीब 9 बजे दूसरा पूजन कर सकते हैं। इस पूजन में दही से अभिषेक करना चाहिए। रात 12 बजे तीसरा पूजन करें। उस पूजा में दूध से अभिषेक करना चाहिए। रात में 3 बजे चौथा शिव पूजन करें। इस तरह सोमवार की रात में चार बार की गई शिव पूजा भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाली मानी गई है। इस तरह पूजा करने के बाद मंगलवार की सुबह किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अपने घर में भोजन कराना चाहिए।

सावन में अलग-अलग अनाज चढ़ाकर भी शिव पूजा की जा सकती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बिल्व पत्र, आंकड़े के फूल के साथ ही चावल, जौ, गेहूं, मूंग आदि अनाज भी चढ़ा सकते हैं।

सावन में रहेंगे 4 सोमवार

ये महीना 12 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन में चार सोमवार आएंगे। पहला सोमवार 18 जुलाई को, दूसरा 25 को, तीसरा 1 अगस्त और चौथा 8 अगस्त को रहेगा। सावन में दो प्रदोष 25 जुलाई और 9 अगस्त को है। 25 जुलाई का प्रदोष सोमवार को होने से इसका काफी अधिक महत्व रहेगा। इसे सोम प्रदोष कहते हैं। इस तिथि पर शिव जी और देवी पार्वती का अभिषेक जरूर करना चाहिए।