बिहार में सियासी उलटफेर के बाद बनी नई सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार 16 अगस्त को किया जाएगा। महागठबंधन की सरकार में मंत्रिमंडल का फॉमूला क्या होगा और किन चेहरों को नीतीश कैबिनेट में जगह मिलेगी, ये तय हो गया है। बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास ने बताया कि नीतीश-तेजस्वी सरकार में किस पार्टी को कितने मंत्री पद मिलेंगे, इसकी संख्या तय हो गई है। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा में पार्टी की क्षमता के अनुसार मंत्री पद दिए जाएंगे।

सम्मानजनक हिस्सा मिला है

बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि महागठबंधन सरकार में शामिल सभी पार्टियों के लिए मंत्रियों का कोटा तय हो गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कितने मंत्री पद मिलेंगे, ये भी तय हो गया है। भक्त चरण दास के अनुसार, 16 अगस्त को नये मंत्रियों को शपथ दिलायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा में पार्टी के विधायकों की संख्या को देखते हुए कांग्रेस को सम्मानजनक हिस्सा मिला है।

कांग्रेस कोटे से 4 विधायक बनेंगे मंत्री!

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस पार्टी को चार मंत्री पद दिए जा सकते हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से 5 मंत्री पद की मांग की जा रही है। इधर, दिल्ली से पटना लौटे तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन के घटक दलों के शीर्ष नेतृत्व से बात हो चुकी है। बहुत जल्द कैबिनेट विस्तार होगा। शुक्रवार को तेजस्वी यादव सोनिया गांधी से मिले थे।

नीतीश कैबिनेट में शामिल नहीं होगी भाकपा माले

भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने शनिवार को साफ कर दिया कि भाकपा (माले) नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी, लेकिन सरकार को पुरजोर समर्थन देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में नागरिक समाज व न्यायपूर्ण आंदोलनों के दमन की जो दिशा ली गई है, हम उम्मीद करते हैं कि बिहार की नई सरकार उसके खिलाफ सकारात्मक रूख के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी नागरिक समाज और सरकार के बीच एक सार्थक संवाद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। उन्होंने महागठबंधन से मांग करते हुए कहा कि राज्य के सभी रिक्त पदों पर बहाली हो और 10 लाख रोजगार का वादा पूरा किया जाए।

उन्होंने कहा कि वादे के मुताबिक, बिहार में कार्यरत आशा कार्यकर्ता, रसोइया, आंगनबाड़ी कर्मियों और तमाम स्कीम वर्करों को जीने लायक सम्मानजनक मासिक मानदेय की गारंटी की जानी चाहिए। भाकपा (माले) ने अग्निपथ, एनटीपीसी, अन्य रोजगार आंदोलन सहित राजनीतिक, सामाजिक कार्यकर्ताओं व आंदोलनों के क्रम में थोपे गए सभी मुकदमों को वापस लेने की भी मांग की है। नई सरकार को इस बात की भी गारंटी करनी चाहिए स्मार्ट सिटी के नाम पर बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए एक भी परिवार का घर न तोड़ा जाए।