दशकों से राजधानी पटना के स्काईलाइन की शोभा बढ़ाता गोलघर आज 236 साल का हो गया। इस गोलघर ने न जाने कितने बदलाव देखे। अंग्रेजों के जमाने में बना गोलघर आज भी पटना के सबसे फेमस लोकेशन में से एक है। पटना आने वाला कोई भी व्यक्ति एक बार गोलघर अवश्य जाना चाहता है। इसका निर्माण आज ही के दिन 20 जुलाई 1786 को हुआ था। आज हम आपको इस ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े खास बातें बता रहे हैं।

140000 टन अनाज रखने की है क्षमता

जानकारी के अनुसार गोलघर के निर्माण की जिम्मेदारी ब्रिटिश इंजिनियर कप्तान जॉन गार्स्टिन को सौंपी गई थी। कप्तान जॉन गार्स्टिन ने अनाज के भंडारण के लिए गोल ढांचे का निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरू किया। ब्रिटिश फौज के लिए इसमें अनाज सुरक्षित रखने की योजना थी। इसका निर्माण कार्य महज ढाई साल में ब्रिटिश राज में 20 जुलाई 1786 को पूरा हुआ। इसमें एक साथ 1,40,000 टन अनाज रखा जा सकता है।

ये है गोलघर से जुड़ी खास बातें

इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके निर्माण में कोई भी पिलर का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसकी ऊंचाई 29 मीटर एवं दीवारों की मोटाई 3.6 मीटर है। इसके साथ ही गोलघर के शिखर पर तीन मीटर के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही गोलघर के उपर 2.7 फीट व्यास का छिद्र है जहां से इसके अंदर अनाज डाला जाता था। गोलघर के शीर्ष पर जाने के लिए 145 सीढ़ियों का भी निर्माण किया गया था।

हालांकि गोलघर को जिस उद्देश्य से बनाया गया था उस उद्देश्य को या पूरा नहीं कर पाया। इसमें कभी भी पूरा अनाज नहीं भरा जा सकता क्योंकि इसके दरवाजे अंदर की तरफ खुलते हैं। अगर पुराना आज भर दिया जाए तो दरवाजे खुलेंगे ही नहीं। इतना ही नहीं गर्मी की वजह से आनज जल्दी खराब भी होते हैं।