पटना/रांची: आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रांची जेल लाया गया है।जेल पहुंचने के बाद जेल में ही डॉक्टरों की टीम के द्वारा लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ की जांच की गई। इससे पहले जैसे ही लालू प्रसाद यादव को रांची जेल लाये जाने की सूचना मिली, जेल में हलचल बढ़ गई थी। जेल के बाहर भी आधे किलोमीटर दूर तक किसी के भी आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जेल परिसर के बाहर सुरक्षा कर्मी भी तैनात कर दिए गए है। लालू यादव को फिलहाल जेल के सुपर डिवीजन में रखा गया है। लालू प्रसाद यादव जेल में रहेंगे या फिर उन्हें रिम्स भेजा जाएगा। इसका निर्णय जेल के डॉक्टर लेंगे।

क्या है मामला: बहुचर्चित चारा घोटाले के सबसे बड़े मामले डोरंडा ट्रेजरी गबन केस में मंगलवार को फैसला आ गया। सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव को दोषी करार दिया गया। इसके अलावा 74 अन्य लोग भी दोषी करार दिए गए हैं। वहीं, 24 आरोपियों को बरी कर दिया। इस केस में सजा का ऐलान 21 फरवरी को होगा। आरजेडी सुप्रीमो को कोर्ट की ओर से दोषी करार देते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जिसके बाद लालू प्रसाद यादव को रांची जेल लाया गया है।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ( RJD Chief Lalu Yadav ) चारा घोटाले में सातवीं बार जेल जायेंगे। रांची स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ( CBI Court ) ने डोरंडा ट्रेजरी से 139.5 करोड़ की अवैध निकासी के मामले में मंगलवार को दोषी करार दिया है। इसके तुरंत बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में ले लिया गया था। लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई अदालत में दरख्वास्त लगाई है कि उनका स्वास्थ्य बेहद खराब है। इस आधार पर उन्हें जमानत दी जाये या न्यायिक हिरासत में रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) भेजा जाये।

गौरतलब है कि बहुचर्चित चारा घोटाले के इस पांचवें मामले में रांची के डोरंडा थाने में वर्ष 1996 में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। बाद में सीबीआई ने यह केस टेकओवर कर लिया। मुकदमा संख्या आरसी-47 ए/96 में शुरूआत में कुल 170 लोग आरोपी थे। इनमें से 55 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि आठ आरोपियों को सीबीआई ने सरकारी गवाह बना लिया। दो आरोपियों ने अदालत का फैसला आने के पहले ही अपना दोष स्वीकार कर लिया। छह आरोपी आज तक फरार हैं।

यह चारा घोटाले से जुड़ा पांचवां मुकदमा है, जिसमें अदालत ने उन्हें दोषी माना है। इसके पहले चारा घोटाले के चार मुकदमों में अदालत ने लालू प्रसाद यादव को कुल मिलाकर साढ़े 27 साल की सजा दी है, जबकि एक करोड़ रुपए का जुमार्ना भी उन्हें भरना पड़ा।