पटना. जदयू के भीतर केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के विवाद का उम्मीद है कि अब पटाक्षेप हो जाएगा। पूरे मामले में अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहली बार खुलकर सामने आए हैं। नीतीश कुमार ने साफ कर दिया की पार्टी में कहीं कोई विवाद नहीं है। सदस्यता अभियान राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की इजाजत से ही चलाई जाएगी।

बता दें कि जदयू में विवाद एक बार फिर तब खड़ा हुआ था, जब आरसीपी सिंह 11 फरवरी को पटना आए थे और कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए बड़े भोज का आयोजन किया था। उसी भोज में उन्होंने यह ऐलान किया था कि 1 मार्च मुख्यमंत्री को नीतीश कुमार के जन्मदिन के अवसर पर पूरे बिहार में उनके विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाएंगे। इस दौरान सदस्यता अभियान भी चलाया जाएगा और लक्ष्य रखा गया कि 4 लाख नए लोगों को पार्टी से जोड़ें। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने अगले ही दिन यानी 12 फरवरी को साफ कर दिया कि ऐसे किसी अभियान के बारे में पार्टी को जानकारी नहीं है।

अब जदयू में चल रहे इस विवाद को खत्म करने के लिए नीतीश कुमार पहली बार खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि पार्टी के अंदर कोई भी विवाद नहीं है। ललन सिंह और आरसीपी सिंह सभी एकजुट हैं। नीतीश कुमार ने कहा – यदि कोई सोच रहा है कि ललन सिंह और आरसीपीसी में कोई बात है, तो यह उसका भ्रम है। ऐसी कोई बात नहीं है। यह लोगों की गलतफहमी है। इन दोनों नेताओं में इधर-उधर कुछ भी नहीं है। बहुत लोग बहुत तरह की भाषा बोलते हैं, इसलिए इसमें कोई बात ही नहीं है।

पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच अंदरखाने चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए नीतीश कुमार ने यह भी ऐलान कर दिया कि पार्टी के अंदर किसी तरह का सदस्यता अभियान राष्ट्रीय अध्यक्ष की मर्जी के बगैर नहीं चलाया जा सकता। सदस्यता अभियान अपने समय से चलेगा। मेंबरशिप का नया ड्राइव हर 3 साल में शुरू होता है। उसका समय कुछ दिन में आ जाएगा। उसके बाद उसकी शुरुआत होगी। यह काम राष्ट्रीय अध्यक्ष को करना है। जब समय आएगा सदस्यता अभियान भी शुरू कर दिया जाएगा।

कुछ दिन पहले ललन सिंह ने भी आरसीपी सिंह के बयान पर आपत्ति दर्ज की थी। उन्होंने कहा था कि कौन लोग क्या अभियान चला रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं है। अब खुद सबसे बड़े नेता सामने आए हैं और कहा है कि अभी मेंबरशिप अभियान चलाने का समय नहीं आया है। समय पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह इसकी घोषणा करेंगे। मुख्यमंत्री के सामने आने के बाद अब संभावना है कि जेडीयू के भीतर दो बड़े नेताओं के बीच जारी गतिरोध पर विराम लग जाएगा।