परिहार प्रखंड के दुबे टोला गांव की महादलित बस्ती की इंदिरा कुमारी पहली ऐसी बेटी है जिसने मैट्रिक की परीक्षा पास की है. बाल समिति की सदस्य इंदिरा कुमारी मैट्रिक परीक्षा पास होने वाली बेटी बनी. इंदिरा ने मैट्रिक एग्जाम सेकंड डिवीजन से पास किया है. इंदिरा को ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ से प्रेरणा मिली. ज्ञान की लौ से महादलित बस्ती दुबे टोला से अशिक्षा का अंधियारा मिटाने निकली बाल समिति की सदस्य इंदिरा के जज्बे की सराहना प्रदेश भर में लोग कर रहे हैं. 

बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक ने बढ़ाया था इंदिरा का मनोबल 
बता दें कि परीक्षा के दौरान बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने स्वयं इंदिरा से बात कर उसके मनोबल को बढ़ाया था. जिससे इंदिरा का शिक्षा के प्रति लगाव और बढ़ा. वहीं, इंदिरा के हौसलों से प्रभावित होकर अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग  बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने इंदिरा को प्रोत्साहित करने का निर्देश जिला कल्याण पदाधिकारी को दिया था. 

इंदिरा ने परीक्षा पास होने का श्रेय बचपन बचाओ आंदोलन, शिक्षक चंदन मांझी व अपने माता-पिता को दिया है. रिजल्ट की जानकारी मिलने पर बचपन बचाओ आंदोलन के केंद्रीय निदेशक मनीष शर्मा, वरिष्ठ योजना समन्वयक राकेश कुमार, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी प्रियांशु कुमार, सहायक परियोजना अधिकारी मुकुंद कुमार चौधरी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुबोध राउत, पंचायत के मुखिया धनेश्वर पासवान, सरपंच रामप्रवेश राम, टोला सेवक रामप्रवेश मांझी, शिक्षक चंदन मांझी, सत्येंद्र कुमार यादव ने इंदिरा को बधाई दी है.  

बेटियों को पढ़ाने के लिए गांव के अन्य लोग भी हुए जागरूक
बचपन बचाओ आंदोलन के सहायक परियोजना अधिकारी मुकुंद कुमार चौधरी का कहना है कि इंदिरा के परीक्षा पास होने से गांव में इतिहास लिखा गया है.  यह हमारे संघर्ष की जीत है और आने वाले दिनों में हम और भी मजबूती के साथ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का काम करेंगे. वहीं, दुबे टोला गांव के बाल संरक्षण समिति के सदस्य चंदन मांझी ने कहा कि इंदिरा का मैट्रिक पास होना हमारे गांव के लिए सबसे खुशी की बात है. आज हमारा प्रयास सफल हुआ है. इससे गांव में सभी लोग अपनी बेटियों को अब पढ़ाने के लिए जागरूक हुए हैं. वर्षों से चली आ रही कुरीतियां बचपन बचाओ आंदोलन के प्रयास से समाप्त हुई है.