युवक का नाम है संजय। बीएससी उत्तीर्ण करने एमबीए की सोची और पढ़ाई शुरू भी कर दी, मगर, अपने परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के चलते पढ़ाई भी ध्यान न दे सका और फेल हो गया। चार साल गुजर गए, मगर एमबीए का सपना और हौसला दृढ़ है। पढ़ाई में आर्थिक तंगी आड़े न आए, इसलिए एक माह से कचौड़ी का ठेला लगाना शुरू कर दिया है। अच्छी कमाई की आस के साथ जीवन के अच्छे दिन लाने का प्रयास शुरू कर दिया है। संजय का साथ दे रहा है उसका भतीजा, जो हाईस्कूल फेल है।

कंपिल क्षेत्र के गांव दीपपुर नगरिया निवासी वीरेंद्र बाबू मिश्रा के पुत्र सत्यम मिश्रा वर्ष 2018 में बरेली हाईवे स्थित संस्थान में एमबीए के छात्र थे, लेकिन परीक्षा में फेल हो गए। कुछ समय भटकने के बाद सत्यम ने शहर की आवास विकास कालोनी में कमरा किराए पर ले लिया और लोहिया प्रतिमा के पास कचौड़ी का ठेला लगाने लगे।

उनका पारिवारिक भतीजा नितिन मिश्रा भी हाईस्कूल में फेल हो गया था। वह भी सत्यम का साथ दे रहा है। सत्यम बताते हैं कि पिता के नाम करीब सात बीघा जमीन है। बड़े भाई शिवदत्त मिश्रा दिल्ली में रहते हैं। तीन बहनों की शादी हो चुकी है। वह खुद और एक बहन अविवाहित हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से अच्छी तरीके से पढ़ाई नहीं कर पाए और एमबीए में फेल हो गए।

उन्होंने कासगंज के हजरत निजामुद्दीन डिग्री कालेज बकराई से बीएससी किया है। ठेले पर डिजिटल भुगतान की व्यवस्था भी कर रखी है। उन्होंने बताया कि दुकान से अच्छी कमाई हो गई तो फिर एमबीए में दाखिला लेंगे और पास होकर दिखाएंगे।