नई दिल्ली : यदि कुछ कर दिखाने का जुनून हो तो आसानी से सफलता को हासिल किया जा सकता है। आप सभी ने विजय सेल्स का नाम तो सुना ही होगा। ये कंपनी आज कई बड़े शहरों में अपना विस्तार कर चुकी है। इस कंपनी के आज 75 से ज्यादा स्टोर्स भी हैं और इस कंपनी को इन ऊंचाइयों तक पहुंचाने का श्रेय जाता है नानू गुप्ता। नानू ने ही कड़े संघर्ष के बाद अपनी इस कंपनी को खड़ा किया है।

नानू गुप्ता हरियाणा के कैथल के रहने वाले हैं जिन्होंने विजय सेल्स को बहुत छोटे से ही शुरू किया था लेकिन आज अपनी कड़ी मेहनत और कुछ कर दिखाने के जुनून के कारण ही वे सफलता के मुकाम को हासिल कर चुके हैं। नानू ने ज्यादा पढ़ाई भी नहीं की है और काम की तलाश में उन्होंने अपना घर भी छोड़ दिया था। लेकिन आज वे एक सफल बिज़नसमैन के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। आइए जानते हैं।

काम की तलाश में छोड़ दिया था घर

कड़ी मेहनत और जुनून से वाकई जिंदगी में हर मुकाम को हासिल किया जा सकता है। ऐसी ही कुछ कहानी है विजय सेल्स के मालिक नानू गुप्ता की जो आज अनेकों युवाओं के लिए भी उनके रोल मॉडल बन चुके हैं। लेकिन नानू के लिए ये सफर आसान नहीं था। उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद इस सफलता को हासिल किया है। नानू मूल रूप से हरियाणा के कैथल के रहने वाले हैं। नानू का परिवार भी खेती बाड़ी पर ही आधारित था। लेकिन नानू हमेशा से ही कुछ बड़ा करने का सपना देखते थे।

हालांकि उन्होंने सिर्फ 10वीं तक ही पढ़ाई की थी और महज 18 वर्ष की उम्र में काम की तलाश में मुंबई आ गए थे। 1954 में नानू मुंबई आए थे। मुंबई आकर नानू ने सेल्समैन के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। यहाँ लगभग एक दशक तक नानू ने काम किया था। लेकिन अब नानू ने खुद का कुछ करने का मन बनाया।

नई सोच के साथ शुरू किया इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का बिज़नस

एक सेल्समैन के तौर पर काम करने के बाद नानू ने इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया। हालांकि ये वो समय था जब टीवी भारत में इतना ज्यादा प्रचलन में नहीं था। लेकिन नानू अपने जुनून के बूते आगे बढ़ना चाहते थे। इसके लिए नानू ने मुंबई के माटुंगा में ही किराए की दुकान लेकर अपना स्टोर शुरू कर दिया। खास बात ये थी उस वक़्त उनके पास सिर्फ 2500 रूपये ही थे।

वहीं वे हर महीने 30 रूपये दुकान का किराया भी दिया करते थे। नानू को बिज़नस को कोई अनुभव भी नहीं था लेकिन कुछ करने की चाह उनके मन में जरूर थी। शुरुआत में नानू ने पंखे, ट्रांज़िस्टर और सिलाई मशीन की रिटेलिंग से ही अपने बिज़नस को शुरू किया था। अपने इस स्टोर के खुलने के बाद नानू ने एक साल बाद ही अपनी कंपनी को भी रजिस्टर करा लिया था।

डिस्प्ले सिस्टम से बनाई ग्राहकों के बीच अपनी पहचान

शुरुआत में नानू ने अपने स्टोर को विजय टेलीविज़न स्टोर का नाम दिया था लेकिन बाद में इसका नाम विजय सेल्स रख दिया गया था। नानू ने अपने बिज़नस का नाम भी अपने भाई के नाम पर ही रखा क्यूंकि वे उनसे बेहद प्यार करते हैं। 1972 में नानू ने ब्लैक एंड व्हाइट टीवी बेचने शुरू किए जो लोगों को खूब पसंद आ रहे थे। नानू की दुकान भी अब अच्छी ख़ासी चल रही थी। इसके बाद नानू ने रंगीन टीवी बेचना भी शुरू कर दिया। 1986 में विजय सेल्स का पहला बड़ा स्टोर बांद्रा में खुला था।

हालांकि हमेशा से ही नानू दूर की सोचते थे। नानू ने ही सबसे पहले डिस्पले सिस्टम को शुरू किया था। वे चाहते थे कि उनके प्रॉडक्ट की पूरी रेंज उनके ग्राहक अच्छे से देख पाएँ। ऐसे में उनका ये आइडिया भी काम कर गया और धीरे धीरे अब विजय सेल्स के और भी स्टोर खुलने लगे थे। डिस्प्ले सिस्टम को पहली बार विजय सेल्स द्वारा ही शुरू किया गया था।

हर चुनौती का किया डटकर सामना

हालांकि इस बिज़नस को ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए नानू के रास्ते में कई मुश्किलें भी आई लेकिन नानू ने हार नहीं मानी। 2007 में इस तरह का बिज़नस काफी बढ़ने लगा था। रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप्स भी इस बिज़नस में अलग अलग तरीके से अपनी पैठ बना रहे थे। लेकिन नानू की रणनीति बिल्कुल ही अलग थी। जिस समय इन कंपनियों ने बाज़ार में कदम रखा तब विजय सेल्स के 14 स्टोर्स खुल चुके थे।

हालांकि शुरुआत में इन बड़ी कंपनियों का प्रभाव भी बढ़ गया था जिसके बाद नानू के पास विजय सेल्स को बेचने के प्रस्ताव आने लगे। लेकिन नानू का मानना है कि कड़ी महनत कभी भी विफल नहीं होती है। ऐसे में उन्होंने अपने बिज़नस को बेचने के बजाए उसे नए तरीके से चलाने के बारे में सोचा। नानू ने ही ईएमआई पर लोगों को प्रॉडक्ट देने भी शुरू किए थे।

उस समय ये सिस्टम भी बाज़ार में नहीं चलता था। इससे भी उनके बिज़नस को नई ऊँचाइयाँ मिली। आज के समय में इस कंपनी के पुणे, दिल्ली, सूरत जैसे बड़े बड़े शहरों में 75 से भी ज्यादा स्टोर्स हैं। वहीं इस कंपनी का टर्नओवर भी 3250 करोड़ से ज्यादा पहुँच चुका है। आज हर कोई नानू के जज़्बे और हुनर की तारीफ भी कर रहा है।