राष्ट्रपति चुनाव एनडीए के लिए बड़ी चुनौती थी और शुरुआत में पलड़ा विपक्ष का भारी दिख रहा था. एनडीए ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में रही और अपने प्रत्याशी तब उतारे जब विपक्ष की ओर से प्रत्याशी घोषित कर दिए गए. द्रौपदी मुर्मू को (Presidential Candidate Draupadi Murmu) सामने लाकर एनडीए ने विपक्ष को चौंका दिया. राष्ट्रपति चुनाव को लेकर शुरुआती दौर में विपक्ष का पलड़ा भारी दिख रहा था. गेंद नवीन पटनायक के पाले में थी उड़ीसा से आने वाली द्रौपदी मुर्मू पर दांव लगाकर भाजपा के शीर्ष नेताओं ने एक तीर से कई निशाना साध लिए. उड़ीसा की अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार को सामने लाकर जहां नवीन पटनायक को साध लिया गया.

राष्ट्रपति चुनाव में NDA का पलड़ा भारी : द्रौपदी मुर्मू को महिला राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में सामने लाकर NDA ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) का भी समर्थन हासिल कर लिया. शिवसेना, झारखंड मुक्ति मोर्चा का समर्थन भी एनडीए को मिलता दिख रहा है और एनडीए का पलड़ा लगातार भारी होता जा रहा है.

वहीं महागठबंधन नेता बिहार में एकजुटता दिखा रहे हैं. विपक्ष ने यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है और वो 15 जुलाई को पटना आ रहे हैं. लेकिन अब बिहार में महागठबंधन राष्ट्रपति चुनाव में धर्म संकट की स्थिति में दिख रहा है. महागठबंधन नेता खुद को अनुसूचित जनजाति और महिला विरोधी करार देना नहीं चाहते तो दूसरी तरफ यशवंत सिन्हा के पक्ष में भी खड़े दिखते हैं.

द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में विपक्षी खेमे के कई दल : आपको बता दें कि 18 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं. उससे पहले प्रत्याशी बिहार का दौरा कर रहे हैं. द्रौपदी मुर्मू बिहार आ चुकी हैं और अब बारी यशवंत सिन्हा की है. यशवंत सिन्हा महागठबंधन के नेताओं के साथ बैठक करेंगे और उनसे समर्थन मांगेंगे. बिहार में यशवंत सिन्हा के पक्ष में महागठबंधन नेता एकजुट होने का दावा कर रहे हैं.

लेकिन अलग-अलग दलों के नेताओं की राय भी अलग-अलग है. राजनीतिक दल द्रोपदी मुर्मू का खुलकर विरोध करना भी नहीं चाहते हैं. बिहार के मुख्य विपक्षी दल राजद का स्टैंड भी अलग है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि- ‘अगर पहले द्रौपदी मुर्मू का नाम सामने आ जाता तो हम विचार करते और परिस्थितियां अलग हो सकती थी.’