अनाजों की भंडारण को लेकर सही व्यवस्था नहीं होने के कारण बिहार में हर वर्ष हजारों टन अनाज बर्बाद हो जाता है, बस इसी बर्बादी को कम करने के लिए बिहार के हर प्रखंड में है स्टील के नए भंडार गृह बनाए जाने की योजना है। स्टील से बने इन साइलो (गोदाम या भंडार कक्ष) में रखा खाद्यान लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा।

क्या होता है साइलो

साइलो अनाज भंडारण करने की एक नवीन और अत्याधुनिक तकनीक है, जिसको अपना कर अनाज भंडार करने की परंपरा क्षमता से अधिक अनाज भंडारण किया जा सकता है। साइलो स्टोरेज एक स्टील का ढांचा होता है, जिसमें कई बेलनाकार बड़े टैंक होते हैं। इन टैंकों में बिना बोरी के अनाज को लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है।

इस अत्याधुनिक तकनीक की सहायता से अनाज की लोडिंग और अनलोडिंग में भी काफी लाभ होता है और रेलवे साइडिंग के जरिए अनाज की लोडिंग व अनलोडिंग की जाती है, जिससे लोडिंग अनलोडिंग में होने वाले अनाज के नुकसान में काफी कमी आती है।

इन जिलों से शुरुआत

फिलहाल चालू वित्तीय वर्ष में भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा बिहार के बक्सर और कैमूर जिले में साइलो का निर्माण कराया जाएगा कामा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव विनय कुमार ने कहा कि प्रदेश के सभी प्रखंड मुख्यालय में 5 हजार मैट्रिक टन क्षमता का साइलो बनाने का प्रस्ताव है। फिलहाल केंद्र सरकार ने बक्सर और कैमूर में साइलो गोदाम बनाने की सहमति दी है जिसे भारतीय खाद्य निगम बनाएगा।