पटना एयरपोर्ट का विकास होना है। यहां पैरेलल टैक्सी ट्रैक बनाया जाएगा। इसके लिए 75 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। पैरेलल टैक्सी ट्रैक 26.8 एकड़ जमीन पर बनेगा। 21 एकड़ जमीन आईसीएआर की है। वहीं, 1.95 एकड़ जमीन वेटनरी कॉलेज और 3.85 एकड़ जमीन परिवहन विभाग की है। इन सभी जमीनों की नापी हो रही है। नामी पूरी हो जाने के बाद ये जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को औपचारिक रूप से सौंप दी जाएगी। फिर जल्द इन जमीनों पर रनवे के समानांतर 30 मीटर चौड़ा एक टैक्सी ट्रैक बनाया जाएगा।

इससे होकर फ्लाइट लैंडिंग के बाद एप्रन में वापस आ जाएगी। इससे रनवे एक मिनट से अधिक इंगेज नहीं रहेगी। ऐसे में अगले विमान को ऑपरेशन के लिए जल्छ खाली रनवे मिल जाएगी। पैरेलल टैक्सी ट्रैक 1410 मीटर लंबी होगी। यह रनवे-07 के फुलवारीशरीफ छोर से जुड़ी होगी। वहां से मुख्य एप्रन तक आएगी। बता दें पटना एयरपोर्ट पर अधिकतर लैंडिंग चिड़ियाघर की ओर से होती है। पैरेलल टैक्सी ट्रैक बन जाने के बाद चिड़ियाघर की ओर से लैंड होने वाले विमान फुलवारीशरीफ छोर पर पहुंच कर वहां से मुख्य रनवे से वापस एप्रन की ओर लौटने के बजाए पैरेलल टैक्सी ट्रैक से होते हुए एप्रन तक आएगी। इससे रनवे विमान की लैंडिंग के दौरान एक मिनट से भी एक समय में रनवे खाली हो जाएगी।

रनवे की आधाी होगी पैरेलल ट्रैक की चौड़ाई
पैरेलल टैक्सी ट्रैक की चौड़ाई रनवे के ठीक आधी होगी। पटना एयरपोर्ट का रनवे 60 मीटर चौड़ा है। इसमें 45 विमानों के आने-जाने की जगह है। वहीं रनवे के दोनों ओर 7.5-7.5 मीटर के सोल्डर्स हैं, जहां लाइट लगाई गई है। पैरेलल टैक्सी ट्रैक की चौड़ाई 30 मीटर होगी। इसमें 23 मीटर विमानों के आने-जाने के लिए होगा। इसके दोनों ओर 3.5-3.5 मीटर का सोल्डर्स लाइट लगाने के लिए होगा।

देश में तेजी से बढ़ने वाले एयरपोर्ट में
देश में तेजी से बढ़ने वाले एयरपोर्टों में से एक पटना एयरपोर्ट है। यहां कोरोना से पहले हर साल 25 से 30 प्रतिशत सालाना यात्री बढ़ते थे। यह संख्या 42 लाख यात्री तक पहुंच गई थी। अगले चार से पांच साल में यह बढ़कर 70 से 80 लाख होने की संभावना जताई गई है। बढ़ते एयर ट्रैफिक को एकोमोडेट करने के लिए यहां 80 लाख सालाना यात्री क्षमता वाला विशाल टर्मिनल बनाया जा रहा है। क्योंकि, जगह की कमी के कारण दोहरी रनवे बनाना या उसकी लंबाई बढ़ा पाना संभव नहीं है।