प्रसिद्ध हिंदी कवि कुंवर नारायण जी की एक पंक्ति है “कोई दुख मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, वही हारा जो लड़ा नहीं”। आज की कहानी इसी के संदर्भ में है। एक ऐसा बालक कुसंगत और गरीबी में बीता लेकिन उसने अपने दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और कठिन मेहनत से खुद को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। डॉ राजेंद्र भारुड (Dr. Rajendra Bharud) नामक इस शख्स ने देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी पास की।

संघर्ष भरी रही है कहानी

डॉ. राजेंद्र भारूड का बचपन बेहद हीं संघर्षों में बीता। महाराष्ट्र (Maharashtra) के धुले (Dhule) जिले के रहने वाले राजेंद्र के जन्म से पूर्व हीं उनपर दुखों का पहाड़ गिर पड़ा। उनके जन्म से पहले हीं उनके पिता की मृत्यु हो गई। जिसके बाद बहुत से लोगों ने राजेंद्र की माँ से बच्चा गिरा देने को कहा, लेकिन उनकी मां ने इनकार कर दिया। राजेंद्र पालन पोषण के साथ घर के खर्चे चलाने की जिम्मेदारी अब उनके मां पर आ गई। राजेंद्र जी की मां ने शराब बेचने का काम शुरू किया। राजेंद्र बताते हैं कि “उन्हे बचपन से हीं बहुत से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। राजेंद्र जब 2-3 साल की उम्र में रोते थे तो शराबियों को दिक्कत होती थी इसलिए वो दो चार-बूंद शराब उनके मुंह में डाल देते और मैं वह पी के चुप हो जाता था”। जिस उम्र में बच्चे को दूध पिलाई जाती है, गरीबी और अभाव के कारण उनके मुँह में शराब की कुछ बूंदें दे दी जाती थी।

इस तरह शुरू हुआ शिक्षा का सफर

जब राजेंद्र थोड़े बड़े हुए उन्होंने अपने करियर के बारे में सोचा तो उन्हें एकमात्र शिक्षा का मार्ग हीं बेहतर लगा। लेकिन गरीबी के कारण उनके लिए शिक्षा ग्रहण करना इतना आसान नहीं था। उनके यहां जो लोग शराब पीने आते वे राजेंद्र से कोई न कोई काम जैसे स्नैक्स आदि मंगाते और उसके बदले उन्हें कुछ पैसे दे देते। राजेंद्र उन पैसों को इकट्ठा करके उससे किताबे खरीद लेते जिससे थोड़ी हद तक उनकी पढ़ाई शुरू हो गई। राजेंद्र को पढ़ाई के प्रति रुझान को देखकर उनकी माँ ने भी उनका पूरा साथ दिया।

राजेन्द्र पढ़ाई में हमेशा रहे अव्वल

राजेंद्र जी तोड़ मेहनत कर पढ़ाई करते रहे जिसके कारण उन्होंने 10वीं में 95% अंक व 12वीं में 90% अंक प्राप्त किए। बेहतर अंक प्राप्त करने के बाद राजेंद्र को पढ़ाई में और भी मन लगने लगा और अंततः उन्होंने मेडिकल की परीक्षा पास कर ली। उन्होंने मुम्बई (Mumbai) स्थित सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज (Seth GS Medical College) में दाखिला ले लिया।

यूपीएससी (UPSC) में पाई सफलता

राजेंद्र ने जब अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर ली तो उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने का लक्ष्य बनाया तैयारी में जुट गए। उन्होंने यह दृढ़ संकल्प बना लिया था कि मुझे किसी तरह यूपीएससी की परीक्षा पास करनी हीं है। अपनी कठिन मेहनत के बल पर उन्होंने साल 2012 में 527वें रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा में पास कर ली।

राजेंद्र कहते हैं कि लोग यह कहकर उनका मजाक उड़ाया करते थे कि “शराब बेचनेवाले का बेटा शराब ही बेचेगा”। लेकिन राजेंद्र ने अपने दृढ़ संकल्प और कठिन मेहनत से सफलता की जो पराकाष्ठा की वह अन्य कई युवाओं के लिए प्रेरणाप्रद है।