नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन में फंसे भारतीयों को जल्द से जल्द निकालने के लिए अपने चार मंत्रियों को यूरोप के अलग-अलग देशों में तैनात रहने का निर्देश दिया और ये सारे मंत्री इस जिम्मेदारी को निभाने ठीक उसी तरह जुट गए, जिस तरह भगवान राम के निर्देश पर हनुमान जुटे थे। मोदी ने सोमवार को मंत्रियों को निर्देश दिए थे और सारे मंत्री मंगलवार को अपने को अलॉट किए गए देशों तक पहुंच गए और भारतीयों को सकुशल निकालने के लिए काम शुरू भी कर दिया। इससे यूक्रेन से भारतीयों की वतन वापसी भी और तेज हुई और जो थोड़ी दिक्कतें आ रही थीं, वो भी फटाफट दूर हो गईं।

मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रोमानिया में मोर्चा संभाला। वहां पहुंचते ही सिंधिया ने भारतीय राजदूत से हवाई अड्डे पर ही मीटिंग की और भारतीय छात्रों के लिए हर संभव मदद, भोजन और फ्लाइट में बैठने से पहले रुकने की व्यवस्था को चाक-चौबंद कराया। इसी तरह कानून मंत्री किरेन रिजिजू स्लोवाकिया पहुंच गए हैं। वहां उन्होंने भी मोर्चा संभाल लिया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हंगरी और वीके सिंह ने मोल्दोवा पहुंचकर सारी व्यवस्था की निगरानी अपने हाथ में ले ली है। यूक्रेन में अभी करीब 8000 भारतीय हैं। इनमें से 4000 पश्चिमी सीमा से सटे देशों तक पहुंचाए जा रहे हैं और अगले 3 दिन में 26 उड़ानों से इन्हें वापस लाया जाएगा। इसके अलावा लवीव और खारकीव में बमबारी की वजह से जो छात्र वहां रुके हैं, उन्हें रूस के रास्ते वापस लाने की तैयारी की जा रही है।

अब तक भारतीयों को हंगरी और रोमानिया तक पहुंचाकर वापस लाया जा रहा था। अब पोलैंड, मोल्दोवा और स्लोवाक गणराज्य के रास्ते भी खोले जाने वाले हैं। खुद पीएम मोदी ने इन देशों के नेताओं से बात की है। पोलैंड समेत इन सभी देशों ने मोदी को भरोसा दिलाया है कि भारतीयों से कोई वीजा फीस नहीं ली जाएगी और उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी। बता दें कि इन देशों की सीमा के पास यूक्रेन में भारतीयों को भोजन तक नहीं देने की शिकायत सामने आई थी। ऐसे में मोदी सरकार ने जरूरी कदम उठाए हैं।