टोक्यो पैरा ओलंपिक में शटलर प्रमोद भगत ने भारत को बैडमिंटन में पहला स्वर्ण पदक दिलाया था। पैरा ओलंपिक खेलों तक का सफर प्रमोद भगत के लिए आसान नहीं था। वह कहते हैं कि पैरा ओलंपिक से कुछ माह पहले उनकी मां का देहांत हो गया था। अपनी मां के चले जाने के कारण प्रमोद भगत बुरी तरह से टूट गए थे। उड़ीसा सरकार ने 2021 मेजर ध्यानचंद खेल रत्न के लिए देश को गौरवान्वित करने वाले प्रमोद भगत के नाम की सिफारिश की है।

आइए जानते हैं कौन हैं प्रमोद भगत

4 जून 1988 को जन्मे प्रमोद का ताल्लुक वैसे तो बिहार से है, मगर वह और उनका पूरा परिवार उड़ीसा के बरगढ़ जिले के अट्टाबिरा में रहता है । 5 साल की उम्र में पैर में पोलियो होने के बाद वह इलाज कराने के लिए ओडिशा चले गए थे। पोलियो होने के बाद वह भी प्रमोद का बैडमिंटन के प्रति लगाव कभी कम नहीं हुआ। टोक्यो में अपने बेहतरीन प्रदर्शन के के बाद प्रमोद ने सिर्फ अपने देश भारत का ही नहीं बल्कि अपने राज्य बिहार और उड़ीसा का भी नाम रोशन किया।

बैडमिंटन के प्रति उनका जुनून इस कदर था कि वह कई घंटे तक अभ्यास करते रहते थे। शुरुआती समय में उन्होंने जिला स्तर पर बहुत मैच जीते। फिर पैरा बैडमिंटन की ओर रुख किया। इसके बाद प्रमोद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने अनेकों रिकॉर्ड अपने नाम किए। 2018 पैरा एशियाई खेलों में उन्होंने एक सिल्वर और एक ब्रांच मेडल जीता था। विश्व चैंपियनशिप में वे 4 बार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। कुल मिलाकर प्रमोद अब तक 45 अंतर्राष्ट्रीय मेडल जीत चुके हैं।