PATNA: जनता दल यूनाइटेड (JDU) से राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) में बेटिकट किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह (RCP Singh) की सियासत किस करवट बैठेगी, इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। टिकट कटने के बाद वे भले ही मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) से नाराजगी नहीं होने की बात क बीच उनके तेवर कुछ और बयां कर रहे हैं। मंगलवार को एक कार्यक्रम में आरसीपी सिंह व नीतीश कुमार के बीच मंच पर तो दुआ-सलाम हुआ, लेकिन जाते वक्‍त उन्‍होंने एक-दूसरे का अभिवादन नहीं किया। आरसीपी सिंह राज्‍यसभा चुनाव के प्रत्‍याशियों के नामांकन के दौरान भी नहीं दिखे।

बीते दिन मीडिया से बातचीत के दौरान वे नीतीश कुमार की लाइन से हटकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्टैंड का समर्थन करते दिखे। आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद के योग्‍य (PM Material) बताने वालों को खरी-खरी सुनाई तथा उनके प्रधानमंत्री (Prime Minister) बनने की संभावना को नकार दिया। ऐसे में सवाल यह है कि क्‍या वे जेडीयू में बीजेपी के साथ खड़ा होकर नीतीश कुमार के लिए परेशानी का सबब बनेंगे? या जेडीयू छोड़कर बीजेपी ज्‍वाइन कर लेंगे?

वक्‍त आने पर पार्टी ने लगा दिया किनारे

सबसे पहले पूरे मामले को समझ लें। आरसीपी सिंह को जेडीयू में बीजेपी का करीबी नेता माना जाता है। कहा जाता है कि उन्‍होंने केंद्र सरकार में मंत्री पद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति के बिना स्‍वीकार किया था। हालांकि, उन्‍होंने इससे इनकार किया था। पार्टी के अध्‍यक्ष पद से हटाए जाने के बाद नए अध्‍यक्ष ललन सिंह (Lalan Singh) से उनकी नहीं बनी। बताया जाता है कि इन कारणों से वक्‍त आने पर पार्टी ने उन्‍हें किनारे लगा दिया। हालांकि, मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ऐसा नहीं मानते हैं। ललन सिंह ने भी आरसीपी सिंह को सम्‍मानित व वरीय नेता बताया है। आरसीपी ने भी ऐसे ही बयान दिए हैं।

नीतीश के पीएम बनने का सवाल नहीं

लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है। यह आरसीपी सिंह के बयानों से स्‍पष्‍ट है। बिहार में कुछ समय से नीतीश कुमाऱ के राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) छोड़ने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के सामने विपक्ष का चेहरा (PM Face of Opposition) बनने तक की चर्चाएं होती रहती हैं। हाल के दिनों में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की तेजस्‍वी यादव (Tejashwi Yadav) से तीन मुलाकातें चर्चा में हैं। दोनों नेताओं के बीच चौथी मुलाकात बिहार में जातिगत जनगणना (Caste Based Census) के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में बुधवार को होगी। इन मुलाकातों के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। इसपर आरसीपी सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री के लिए 273 सीट चाहिए और बिहार में हमारे पास अभी 16 हैं। ऐसे में कोई दूसरा प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है? आरसीपी ने तीसरे मोर्चे (Thirs Front) की संभावना को भी खारिज कर दिया। नीतीश को पीएम मटेरियल बताने वाले जेडीयू नेताओं को भी आरसीपी सिंह ने झगड़ा लगाने वाला बता दिया।

मंत्रिमंडल में स्‍थान बीजेपी की उदारता

पहले बता चुक हैं कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जेडीयू को केवल एक सीट दिए जाने को लेकर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। आरसीपी ने इसे लेकर नीतीश कुमार के साल 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्‍तार के वक्‍त सांकेतिक भागीदारी की जगह आनुपातिक प्रतिनिधित्व के तर्क पर भी सवाल खड़ा किया। कहा कि 303 सीटें जीतने के बाद भी यदि बीजेपी ने जेडीयू को मंत्रिमंडल में एक स्‍थान दिया तो यह उसकी उदारता है, उसने बुलाया यही बड़ी बात है।

जातिगत जनगणना पर बीजेपी के साथ

बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर राजनीति गर्म है। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में हर हाल में जातिगत जनगणना कराने के पक्ष में है। इसमें उसे विपक्ष का साथ मिला है। बीजेपी का स्‍टैंड देश में जातिगत जनगणना के खिलाफ है। हालांकि, वह कहती है कि राज्‍य चाहें तो अपने खर्चे पर जातिगत जनगणना करा सकते हैं। इस मामले में आरसीपी सिंह की राय नीतीश कुमार से मेल नहीं खाती। वे केंद्र सरकार के फैसले के साथ हैं।

जेडीयू में चुप नहीं रहेंगे, रखेंगे अपनी बात

आरसीपी सिंह ने जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह द्वारा पार्टी में प्रकोष्ठों की संख्या 33 से घटाकर 13 करने पर भी सवाल उठाए। आरसीपी सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए प्रकोष्ठों की संख्या बढ़ाकर 33 कर दी थी, लेकिन ललन सिंह ने अध्‍यक्ष बनने पर इस फैसले को निरस्‍त कर दिया। इसपर बयान देकर आरसीपी ने स्‍पष्‍ट कर दिया कि वे जेडीयू में रहते हुए अपने खिलाफ किसी अभियान पर चुप नहीं रहेंगे।

जेडीयू में रहेंगे या बीजेपी ज्‍वाइन कर लेंगे?

अब सवाल यह है कि क्‍या आरसीसी सिंह जेडीयू में बने रहकर बीजेपी के साथ खड़ा दिखेंगे? क्‍या महत्‍वपूर्ण मुद्दाें पर नीतीश कुमार से अलग स्‍टैंड लेकर वे परेशानी का सबब बनेंगे? अगर हां, तो पार्टी उन्‍हें कब तक बर्दाश्‍त करेगी? जेडीयू में जार्ज फर्नांडिस व दिग्विजय साल 2009 में बेटिकेट किए गए थे। शरद अध्यक्ष पद से हटाए गए थे। उपेंद्र कुशवाहा 2006 में तो ललन सिंह 2010 में गए, फिर वापस आए। जीतन राम मांझी सीएम बनाकर फिर हटाए गए। अब आरसीपी सिंह बेटिकट किए गए हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जेडीयू में आरसीपी उक्‍त बड़े नेताओं में से किसका इतिहास दोहराएंगे? वे जेडीयू में रहेंगे या बीजेपी ज्‍वाइन कर लेंगे?