पटना: शराब नीति को लेकर बिहार सरकार के फैसले (Liquor prohibition law in Bihar) पर आरजेडी ने विरोध जताया है। राजद का कहना है कि ये तो अजीबोगरीब निर्णय है। इससे तो प्रदेश में खून खराबा और बढ़ जाएगा। राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि बिहार सरकार की इस शराबबंदी (Liquor ban in Bihar) की आलोचना सुप्रीम कोर्ट ने भी की है।

शक्ति यादव ने कहा कि बिहार में जारी शराबबंदी की नीति आम लोगों के हित में नहीं है और ऐसे में उत्पाद विभाग द्वारा लिया गया यह फैसला आम लोगों के लिए कठिनाईयों का सबब बनेगा। उन्होंने कहा कि शराब पीने वाला व्यक्ति ही अगर शराब बेचने वाले व्यक्ति का ठिकाना पुलिस को बताएगा, तो इससे उसकी दुश्मनी शराब माफियाओं से हो जाएगी और ऐसे में खून खराबे की स्थिति बन सकती है। सरकार और विभाग द्वारा लिए गए इस फैसले पर सरकार और विभाग को एक बार फिर से सोचना चाहिए।

बता दें कि सरकार ने अपने नियम में बदलाव करते हुए कहा है कि अब शराब पीकर पकड़े जाने वाले शराबी जेल नहीं जाएंगे। उत्पाद विभाग ने ये निर्णय लिया है। हालांकि उसका कहना है कि इसके लिए पीने वाले को ये सूचना देनी होगी कि शराब आयी कहां से या फिर शराब पीने वाले व्यक्ति को किससे और कहां से शराब मिली।

उत्पाद विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी कृष्ण कुमार सिंह ने ये जानकारी दी है। उन्होंंने बताया कि जेलों में बढ़ती शराबियों की संख्या के मद्देनजर ये बड़ा फैसला लिया गया है। पुलिस और मद्यनिषेध विभाग को नीतीश सरकार ने समीक्षा बैठक के बाद ये अधिकार दिया है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद कहीं ना कहीं राज्य सरकार ऐसा करने पर विवश हुई है। कृष्ण कुमार ने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि अब तक करीब 3 से 4 लाख व्यक्तियों को शराब पीने के आरोप में जेल भेजा गया है। हालांकि, बिहार सरकार जेल जाने के बाद शराब पीने वालों की संख्या का सर्वेक्षण करने वाली है। इसकी घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार शाम को दावा किया था कि बिहार सरकार राज्य में सफलतापूर्वक शराबबंदी लागू करने और इसके लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि बिहार सरकार ने 2016 में शराबबंदी कानून लागू किया था। कानून के तहत शराब की बिक्री, पीने और इसे बनाने पर प्रतिबंध है। शुरुआत में इस कानून के तहत संपत्ति कुर्क करने और उम्र कैद की सजा तक का प्रावधान था, लेकिन 2018 में संशोधन के बाद सजा में थोड़ी छूट दी गई थी। बता दें कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से बिहार पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक मद्य निषेध कानून उल्लंघन से जुड़े करीब 3 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। बिहार में जारी शराबबंदी को लेकर उत्पाद विभाग और मद्यनिषेध विभाग ने हाल के दिनों में समीक्षा की थी और इसके बाद विभाग ने यह बड़ा फैसला लिया है।

शराब माफियाओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए राज्य सरकार ड्रोन, हेलीकॉप्टर, सैटेलाइट फोन, मोटर बोट, घोड़े, डॉग स्क्वायड का इस्तेमाल कर रही है। इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं करने पर बिहार पुलिस की आलोचना हो रही है। शराब माफियाओं के साथ कथित संबंधों को लेकर कई पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और उनको नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।