नौ दिनों तक चलने वाला शुभ त्योहार शरद नवरात्रि पूरे देश में बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है. इस दौरान भक्त नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा करते हैं. नौवां दिन, यानि महानवमी, देवी दुर्गा के नौवें रूप मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है. ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा ने इस दिन राक्षस महिषासुर का वध किया था, और इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है.

महानवमी तिथि और शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, महानवमी का शुभ मुहूर्त 3 ​​अक्टूबर को शाम 04:37 बजे शुरू होगा और 4 अक्टूबर को दोपहर 02:20 बजे समाप्त होगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:38 बजे से शुरू होकर 05:27 बजे समाप्त होगा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 तक जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 02:08 से दोपहर 02:55 तक रहेगा.

क्या है पूजा विधि?

महानवमी दुर्गा पूजा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है. पूजा की रस्में महास्नान और षोडशोपचार पूजा से शुरू होती हैं और कन्यापूजन के साथ संपन्न होती हैं. इस दिन छोटी लड़कियों को पूजा करने के लिए आमंत्रित किया जाता है और साथ ही उन्हें खाना खिलाया जाता है. इसी तरह से अगर किसी का व्रत है तो छोटी कन्यायों को भोजन करवाकर अपना उपवास खोला जाता है. साथ ही उनका आशीर्वाद लिया जाता है.

नवमी का मंत्र

महा नवमी पर “ॐ देवी सिद्धिदात्रै नमः” का जाप करके देवी सिद्धिदात्री से आशीर्वाद लें.

इस दिन का महत्व

देवी सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की स्रोत हैं और सभी आठ अष्टसिद्धियों को धारण करती हैं. देवी की पूजा करने से सहस्रार चक्र उत्तेजित होता है. हिंदू शिलालेखों के अनुसार, वह अपने भक्तों को अच्छे भाग्य का आशीर्वाद देती है और उन्हें मोक्ष प्रदान करती है.

क्या लगाएं भोग

इस दिन मां सिद्धिदात्री को नारियल, खीर और पंचामृत का भोग लगाएं. कन्या पूजा करते समय, भक्त देवी को पूरी, हलवा और काले चने चढ़ाते हैं.