बिहार में अब लोगों को बालू (Bihar Sand ) की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा. सभी जिलों में फिर से बालू खनन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. इसका असर बालू के रेट पर भी पड़ना तय है. सितंबर के अंत तक या फिर अक्टूबर के शुरुआती दिनों में इसकी इजाजत दी जा सकती है. बालू खनन करने वाले ठेकेदारों से ई-टेंडर के आवेदन मंगाये जाने लगे हैं.

बालू माफियाओं पर लगेगा लगाम

बिहार में मई 2022 तक कोर्ट के आदेश के तहत केवल 16 जिलों के बालू घाटों पर ही खनन हो रहा था. इस कारण से प्रदेश में बालू की किल्लत भी देखी जा रही थी. वहीं खनन रोके जाने के बाद अवैध तरीके से ये काम कई जगहों पर जारी ही रहा. जिसके कारण बालू के रेट मार्केट में अनाप-शनाप तरीके से भागे. बालू माफियाओं की सक्रियता अधिक बढ़ गयी. लेकिन अब इन सबपर जल्द ही लगाम लग सकेगा.

करीब 900 बालू घाटों पर खनन होगा शुरू

बिहार में अब 28 जिलों के करीब 900 बालू घाटों पर खनन शुरू हो जाएगा. खान एवं भू-तत्व विभाग की के निर्देश पर सभी जिलों में बंदोबस्त प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. बता दें कि इसी साल जून से ही नदियों से बालू खनन पर रोक लगा दी गयी थी. जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार हो जाने के बाद अब वापस नदियों से बालू खनन की तैयारी शुरू हो गयी है.

उचित रेट पर मिलेंगे बालू

जब बिहार के सभी जिलों में बालू खनन शुरू हो जाएगा तो लोगों के बीच इसकी किल्लत भी खत्म होगी. मनमाने तरीके से बालू अनाप-शनाप रेट में नहीं बिकेंगे. वहीं राज्य के राजस्व में भी इसका लाभ दिखेगा. अधिक से अधिक लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा. उचित कीमत पर ही लोगों को बालू मिल सकेगा और निर्माण कार्य भी तेज होंगे.