यूँ तो हर व्यक्ति अकेले चलने, मेहनत करने और कामयाब होने की क्षमता रखता है, जिसके कुछ उदाहरण भी हमारे सामने हैं। लेकिन अगर व्यक्ति को उसकी मेहनत के साथ-साथ परिवार का भी सपोर्ट मिल जाए तो उसकी ऊर्जा सातवें आसमान पर पहुँच जाती है। इसका एक बेहद सटीक उदाहरण आज हम साझा करने जा रहे हैं।

इसका उदाहरण बनकर उभरे हैं 2016 की सिविल सर्विस परीक्षा के टॉपर्स की सूची में शामिल अनमोल शेर सिंह बेदी, जिन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की और यूपीएससी परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बन गए।

कौन है आईएएस अनमोल सिंह बेदी

अनमोल अमृतसर पंजाब के रहने वाले हैं। अनमोल के पिता डॉ. सर्बजीत सिंह बेदी NIIT जालंधर के पूर्व रजिस्ट्रार रह चुके हैं और मां जसपाल बेदी सोशल वर्कर हैं। अनमोल ने बताया कि उन्हें बचपन से ही किताबें पढ़ने का बहुत शौक था और इसी शौक ने इन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया। उन्होंने बारहवीं तक की पढ़ाई स्प्रिंग डेल सीनियर स्कूल से की।

फिर बिट्स पिलानी से कंप्यूटर साइंस की और ट्रेनिंग के लिए दिल्ली आ गए। जैसा की अनमोल ने बताया कि सिविल सेवा में जाना उनका बचपन का सपना था। तो उन्होंने अपने पिताजी की अनुमति से ट्रेनिंग के ही दौरान तैयारी शुरु कर दी और आख़िरी प्रयास तक पहुँचने की बजाय अपने पहले प्रयास को ही आख़िरी बना दिया।

अनमोल की तरकीब और अभ्यार्थियों को सलाह

अनमोल ने एक साक्षात्कार में बताया है कि किताबों में उनकी शुरू से बहुत रूचि थी। उन्होंने बचपन से ही अपना कमरा किताबों से भरा देखना पसंद था और फिर इनके पढ़ने का औरों से काफी अलग था, अनमोल बताते हैं कि सिविल सेवा की दौड़ तब तक मुश्किल है जब तक आप एक सही तरीका नहीं चुनते अपनी तैयारी के लिए, जहाँ आपका तरीका सही हुआ वहीं से आप की जीत निश्चित हो जाती हैं।

अभ्यार्थियों को सलाह देते हुए वे कहते हैं कि विषय को पढ़ते समय ही नोट्स बनाने की प्रक्रिया शुरू कर देने चाहिए। जिससे आगे चलकर उस विषय पर दोबारा उतना समय न देना पड़े जितना पहले दिया था और विषय की तह तक जाकर उसको पूरी तरह समझकर ही अगला विषय शुरू करने की सलाह वो देते हैं।

दूसरी रैंक हासिल कर बनीं IAS अधिकारी

आई एफ एस अनमोल शेर सिंह बेदी ने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की और अपने ट्रेनिंग पीरियड में ही upsc की तैयारी भी की। जो की केवल 6 महीने के भीतर की गयी. अनमोल ने उन्हीं 6 महीने में ट्रेनिंग भी पूरी की और तैयारी भी और तैयारी ऐसी की पहले प्रयास में ही सिविल सेवा परीक्षा 2016 में दूसरा स्थान हासिल किया।

इससे ये साबित हो जाता है कि किसी भी काम को करने के लिए कभी देर नहीं होती है बस आपका टाइम-टेबल सटीक होना हो, समय पर आपकी पकड़ हो और आपकी मेहनत में कोई कमी न हो, कामयाबी आपसे ज़्यादा दूर नहीं होगी।