पटना: बिहार में लंबे समय से विशेष राज्य का दर्जा को लेकर सियासत (Politics on Special Status to Bihar) हो रही है। विशेष दर्जे को लेकर सभी दलों ने सर्वसम्मत प्रस्ताव विधानसभा और विधान परिषद से पास कराकर केंद्र को भेजा था लेकिन अब जो मापदंड तय किया गया है, उसके बाद केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि अब बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा। बिहार की सत्ताधारी दल जदयू 2020 चुनाव के रिजल्ट के बाद से इसे फिर से मुद्दा बना रही है।

विशेष दर्जे को लेकर JDU में विरोधाभास:

विशेष राज्य के दर्जे के मुद्दे पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह (JDU National President Lalan Singh) और जेडीयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (JDU Parliamentary Board President Upendra Kushwaha) जिस प्रकार से अभियान चला रहे हैं, उसको लेकर बीजेपी से टकराव भी होता रहा है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल कड़ी नाराजगी भी जताते रहे हैं। वहीं, डिप्टी सीएम रेणु देवी ने तो साफ कह दिया था कि विशेष राज्य के दर्जे की जरूरत नहीं है। बीजेपी और जेडीयू के बीच विरोधाभास बना हुआ है, लेकिन यही विरोधाभास जदयू के अंदर भी खुलकर (Lalan Singh Vs Nitish Kumar) दिखने लगा है।

”इस मुद्दे की अभी चर्चा करने की जरूरत नहीं है। हमलोग ये सब काम करते ही रहते हैं और जो बिहार के लिए जरूरत होती है उसके लिए केन्द्र से बात भी करते रहते हैं. इसको अभी इश्यू बनाने से क्या फायदा। छोड़िए कौन क्या बोलता है। हम लोग तो बिहार के लिए लगातार काम कर रहे हैं। सब देख रहे हैं।”- नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री

”जब रघुराम राजन कमेटी की रिपोर्ट बनाई गई थी, उस रिपोर्ट में कई राज्यों को पिछड़ा घोषित किया गया था, जिसमें बिहार भी था और उस रिपोर्ट में अनुशंसा की गई थी कि उन पिछड़े राज्यों को आगे लाना चाहिए। लेकिन उस समय की कांग्रेस सरकार ने इस रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया। बगैर स्पेशल स्टेटस के अंबेडकर के सपनों का बिहार नहीं बन सकता है। बिहार को जब तक विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा तब तक बिहार विकसित नहीं होगा।”- ललन सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, जदयू

ललन सिंह और सीएम नीतीश के बीच मतभेद: राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद ललन सिंह तो बड़ा अभियान चला रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ नीतीश कुमार एक तरह से उस अभियान की खुद हवा निकाल रहे हैं। पिछले दिनों जनता दरबार में नीतीश कुमार ने विशेष राज्य के दर्जे के सवाल पर साफ कहा इसे मुद्दा बनाना अभी सही नहीं होगा। पहले जदयू के साथ विशेष राज्य के मुद्दे पर जदयू का मतभेद था, लेकिन अब जदयू में ही राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच मतभेद (Differences between Lalan Singh and CM Nitish) दिख रहा है। विपक्ष को हमला करने का एक मुद्दा मिल गया है।

आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी (RJD spokesperson Mrityunjay Tiwari) का कहना है कि जनता समझ नहीं पा रही है कि एक तरफ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह अभियान चला रहे हैं और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह रहे हैं कि अभी इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। सब जानते हैं कि जदयू में नीतीश कुमार जो बोलेंगे वही होना है।

JDU ने भी पहले छोड़ दी थी मांग:

जदयू की ओर से इस अभियान को छोड़ भी दिया गया, लेकिन जब 2020 में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब हुआ तब फिर से इस अभियान को जोर-शोर से चलाना शुरू किया गया, लेकिन पार्टी के अंदर अब इस पर एक राय नहीं दिख रही है। ललन सिंह के अभियान के खिलाफ ही नीतीश कुमार अब बयान दे रहे हैं। विशेष राज्य को लेकर जदयू नेताओं का तर्क रहा है कि विकसित राज्यों की तुलना में बिहार के विकास के लिए विशेष राज्य का दर्जा मिलना जरूरी है। प्रति व्यक्ति आय यहां काफी कम है। बिहार में औद्योगिक निवेश नहीं हुआ है और बड़ी संख्या में लोगों का यहां से हर साल पलायन होता है। बाढ़ से बिहार को हर साल करोड़ों का नुकसान होता है। यह सब बड़े मुद्दे रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी बिहार की मांग को नजरअंदाज किया जाता रहा है और अब तो इस पर राजनीति शुरू है।