हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति की पूजा से की जाती है. सप्ताह में बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित है. वहीं, माह की चतुर्थी तिथि पर गणेश पूजन का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति सभी दुख दूर हो जाते हैं और गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है. 

धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की सच्चे दिल से पूजा करने से गणेश जी भक्तों के सभी विघ्न दूर कर देते हैं. गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है. पूजा में गणेश जी को मोदक का भोग लगाने और दूर्वा अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों को मुंह मांगा वरदान देते हैं. मान्यता है कि गणेश पूजन के बाद बुधवार के दिन गणेश स्तुति अवश्य करनी चाहिए. 

गणेश स्तुति

मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरञ्जकम्।

अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ।। १।।

नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जकं नताधिकापदुद्धरम् ।

सुरेश्वरमं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ।। २।।

समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरं दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।

कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं नमस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ।। ३।।

अकिंचनार्तिमार्जनं चिरंतनोक्तिभाजनं पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।

प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणं कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ।।४।।

नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजमचिन्त्यरुपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम्।

हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि संततम् ।। ५।।

महागणेश पञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं प्रगायति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।

अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतां समाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ।। ६।।