रूस द्वारा आज सीजफायर का ऐलान करने के बाद एक बार फिर से मारियुपोल और वोल्नोवाखा में लड़ाई शुरू कर दी है। इसी बीच यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबास ने कहा कि, पुतिन यूक्रेन को अकेला छोड़ दें। आप यह युद्ध नहीं जीतेंगे। यह रूसियों के जीवन को बचाने और इस लड़ाई को खत्म करने का समय है… 113 कंपनियों ने रूस के साथ या रूस में काम करना बंद कर दिया है। मैं उन कंपनियों के फैसलों की सराहना करता हूं। इसे साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से अपील की है कि वे पुतिन को समझाएं कि युद्ध रोक दें।

यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबास ने कहा कि, भारत के साथ विशेष संबंधों को साझा करने वाले सभी देश प्रधानमंत्री मोदी से अपील कर सकते हैं कि वह राष्ट्रपति पुतिन से संपर्क करना जारी रखें और उनको समझाएं कि यह युद्ध किसी के हित में नहीं है। रूस के लोगों को भी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा कि, भारत यूक्रेन के कृषि उत्पादों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। अगर यह युद्ध जारी रहा तो हमारे लिए नई फसल बोना मुश्किल होगा। वैश्विक और भारतीय खाद्य सुरक्षा के मामले में भी इस युद्ध को रोकना सबके हित में है।

उन्होंने आगे कहा कि, भारत में रूसी दूतावास पर भारतीय लोग दबाव बनाकर रूस से युद्ध रोकने की मांग कर सकते हैं। यूक्रेन केवल इसलिए लड़ रहा है क्योंकि हम पर हमला किया गया था और हमें अपनी जमीन की रक्षा करनी है। पुतिन हमारे अस्तित्व के अधिकार को नहीं पहचानते हैं। मानवीय गलियारे और युद्धविराम मौजूद नहीं हैं क्योंकि रूसी बलों ने मानवीय गलियारों की व्यवस्था के लिए सुबह हुए समझौते का उल्लंघन किया है। हम रूस से विदेशी छात्रों सहित नागरिकों को निकालने की अनुमति देने के लिए गोलीबारी बंद करने का आग्रह करते हैं।

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि, यदि रूस विदेशी छात्रों के मामले में हेरफेर करना बंद कर देता है और फायरिंग रोक देता है, तो उन सभी को सुरक्षित निकाल लिया जाएगा। मैं भारत, चीन और नाइजीरिया की सरकारों से रूस से फायरिंग रोकने और नागरिकों को जाने की अनुमति देने की अपील करता हूं। यूक्रेन पर विदेशी छात्रों को बंधक बनाकर रखने, उनके अधिकारों का उल्लंघन करने, उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाकर रूस इन देशों की सहानुभूति जीतने की कोशिश कर रहा है।