इन दिनों राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। बिहार विधानसभा के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में बिहार विधानसभा सताब्दी समारोह मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने कहा की बिहार हमेशा उन्हें अपनापन का एहसास दिलाता है । आगे उन्होंने कहा कि बिहार हमेशा इतिहास रचता है आज भी एक इतिहास रचा गया बिहार विधान सभा ने अपने 100 वर्ष पूरे किए उसके साथ साथ भारत ने 100 करो वैक्सीनेशन का इतिहास रचा। जब मैं बिहार का राज्यपाल था तब यहां के लोगों ने मुझे भरपूर स्नेह दिया। बिहार मुझे हमेशा अपने का एहसास दिलाता है। उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने मुझे शताब्दी समारोह में आमंत्रित किया। बिहार विधानसभा भवन का शताब्दी समारोह एक उत्सव की तरह है। आज शताब्दी स्तंभ का शिलान्यास कर सुख की अनुभूति कर रहा हूं। यहां का लोक पर्व छठ आज ग्लोबल फेस्टिवल बन गया है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा जब मुख्यमंत्री उन्हें बिहारी राष्ट्रपति से संबोधित कर रहे थे तो उनका मन गदगद हो गया, ऐसा इसलिए क्योंकि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, डॉक्टर जाकिर हुसैन की विरासत को आगे बढ़ाने का मौका मिला है। उन्होंने आगे कहा जब भी बिहार आता हूं, उन्हें अपनापन का एहसास होता है। कभी कभी हमारे सचिवालय के लोग भी प्रश्न कर देते हैं कि जब भी बिहार से बुलावा आता है, मैं मना नहीं कर पाता क्योंकि बिहार से मेरा एक अलग ही लगाव है यहां के लोगों ने मुझे इतना स्नेह दिया है,की यहां से एक अलग ही रिस्ता है। बिहार के राज्यपाल रहते हुए और राष्ट्रपति बनने के बाद भी मुझे उतना ही प्यार यहां के लोगों से मिलता है। बिहार के राज्यपाल रहते हुए मैंने भगवान बुद्ध की विपस्सना पद्धति को आगे बढ़ाने में थोड़ा योगदान दिया जिसे आगे मुख्यमंत्री जी ने बढ़ाया।

सम्पूर्ण विश्व के प्रथम लोकतंत्र की जननी है बिहार

बिहार की धरती विश्व के प्रथम लोकतंत्र की जननी रही है। भगवान बुद्ध ने आरंभिक गणराज्यों को प्रज्ञा और करना की शिक्षा दी थी। भगवान बुध, महावीर और गोविंद सिंह की धरती की मुझ पर विशेष कृपा रही है। यह धरती प्रतिभावान लोगों की धरती है। यह नालंदा, आर्यभट्ट, कौटिल्य की धरती है। उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आप पर है।

बिहार ने स्थापित की समता मूलक परंपरा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि चंद्रगुप्त मौर्य को शासक बनाने से लेकर 70 में जननायक कर्पूरी ठाकुर को सीएम बनाने तक इस धरती ने समतामूलक परंपरा स्थापित की है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए कदम उठाए । सुशासन तथा न्याय के साथ विकास को आगे बढ़ाया गया । स्वाधीनता के बाद लंबे समय तक नीतीश कुमार जी ने मुख्यमंत्री के रूप में अहम भूमिका निभाई।