यूपीएससी में हर साल बहुत सारे विद्यार्थी सफल होते हैं इनमें अधिकतर की कहानी बहुत ही प्रेरणादाई होती है। हर प्रकार के वर्ग से छात्र इस परीक्षा में उत्तीर्ण होते हैं। कोई संपन्न परिवार से आता है तो कोई बेहद ही गरीब परिवार से। आइए उन्हीं उम्मीदवारों में से एक योगेश अशोकराव पाटील की कहानी के बारे में जानते हैं। इनकी कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है और इनकी कहानी को जानकर अलग ही ऊर्जा का संचालन होता है।

बैकग्राउंड का नहीं होता कोई मायना

योगेश का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी करने में बैकग्राउंड का कोई मायने नहीं होता। इससे कतई कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस बैकग्राउंड से यूपीएससी की तैयारी करने आए है। आपको शुरू से तैयारी करनी होगी और कड़ी मेहनत से सफलता को प्राप्त करने के बारे में सोचना होगा।

मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले योगेश पाटिल मैं यूपीएससी में आने से पहले इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी तो स्टॉप वह इंजीनियरिंग के दौरान ही यूपीएससी परीक्षा देने का मन बना चुके थे ऐसे में उन्होंने सटीक रणनीति और कड़ी मेहनत कॉलेज में ही शुरू कर दी थी। सटीक रणनीति के कारण अपने शुरुआती दोनों प्रयासों में योगेश ने सफलता पाई योगेश कहते हैं कि लोगों के दिमाग में यूपीएससी को लेकर कई मिसअंडरस्टैंडिंग है जिन को दूर करना बहुत जरूरी है। कई लोगों का मानना है कि यूपीएससी परीक्षा पहले प्रयास में पास नहीं किया जा सकता जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है अगर सही डायरेक्शन में तैयारी की जाए तो पहले प्रयास में भी यूपीएससी की परीक्षा पास की जा सकती है।

दूसरी बार में ऑल इंडिया रैंक 63 की हासिल का नहीं होता कोई मायना

योगेश अशोकराव पाटील ने लगातार दो बार यूपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त की। 2018 की परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 201 प्राप्त की इसके बाद उनका चयन आईपीएस सेवा के लिए हुआ तो स्टॉप परंतु शुरू से ही आईएएस अफसर बनने का सपना उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया जिसके बाद दूसरी बार उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 63 लाकर सफलता प्राप्त करते हुए अपने सपने को पूरा किया।