यूपीएससी परीक्षा देश की उन परीक्षाओं में से एक है जिसके लिए अभ्यर्थी अपनी सारी ताकत सफलता पाने के लिए झोक देते हैं। कुछ लोग अपनी नौकरी छोड़ देते हैं तो कुछ अपना घर बार छोड़कर अच्छे कोचिंग संस्थानों में जाकर पढ़ाई करते है। लेकिन आज हम आपको जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उनका नाम अपर्णा रमेश हैं।

उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के दौरान ना ही नौकरी छोड़ी और ना ही किसी कोचिंग संस्थान से पढ़ाई की। इसके बावजूद जितना समय मिलता उसी सीमित समय के भीतर पढ़ाई कर अपने आईएएस अधिकारी बनने के सपने को साकार किया। आइए जानते हैं अपर्णा ने कैसे टाइम मैनेजमेंट कर यूपीएससी परीक्षा में ना सिर्फ सफलता हासिल की बल्कि टॉप भी किया।

कौन हैं आईएएस अपर्णा रमेश

कर्नाटक की रहने वाली अपर्णा रमेश एक मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। अपर्णा के पिता भारतीय राजस्व विभाग में नौकरी करते हैं। पिता के राजस्व विभाग में नौकरी करने के कारण अपर्णा को देश के अलग अलग राज्यों में रहने का मौका मिला। दरअसल अपर्णा के पिता की पोस्टिंग होती रहती थी। अपर्णा ने एक साक्षात्कार में बताया था कि अलग अलग राज्यों में रहने के कारण उन्हें काफी कुछ सीखने का मौका मिला।

उनकी पढ़ाई देश के अलग अलग राज्यों में होती रही। वो बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छी थी। यही वजह थी कि उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में अच्छे अंक हासिल किए। अपर्णा ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के साथ ही यूपीएससी तैयारी करना शुरू कर दिया। हालांकि इस बीच उनकी एक कंपनी में नौकरी लग गई। नौकरी के साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।

रोजाना 6-7 घंटों की करती थी पढ़ाई

अपर्णा नौकरी के साथ यूपीएससी की तैया्री भी कर रही थीं। इसलिए उनके पास बहुत कम समय मिल पाता था। ऐसे में उन्होंने उन विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया जिनकी उन्हें काफी समझ थी। ऐसे में उन्होंने कम समय के भीतर ही यूपीएससी की तैयारी में सफलता हासिल कर ली। अपर्णा बताती हैं कि वो रोजाना सुबह 4 बजे से 7 बजे तक पढ़ाई करती थीं। इसके बाद वो अपने ऑफिस जाती थीं। ऑफिस से वापस आने के बाद वो जो समय मिल पाता उसमें यूपीएससी की तैयारी में लगा देती थी। वहीं साप्ताहिक छुट्टी के दिन 6-7 घंटों की पढ़ाई किया करती थी।

तीसरे प्रयास में मिली यूपीएससी परीक्षा में सफलता

अपर्णा को तीसरे प्रयास में आईएएस अधिकारी बनने का मौका मिला। पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिल पाई थी। वहीं दूसरे प्रयास में उनकी रैंक ज्यादा अच्छी ना होने के कारण उनका वो आईएएस अधिकारी ना बन सकी। साल 2020 में सिविल सेवा में उन्होंने 35वीं रैंक हासिल की।

इस रैंक के साथ उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा कर लिया। अपर्णा की सफलता ये बताती है कि अगर मेहनत पूरी सिद्दत के साथ की जाए तो सफलता जरूर मिलती है।